एचपी हाईकोर्ट: बीएड प्रशिक्षु पसंदीदा संस्थान में परीक्षा देंगे, एनेस्थीसिया प्रोफेसर नियुक्ति पर रोक

HP High Court: पसंद के संस्थान में परीक्षा दे सकेंगे बीएड प्रशिक्षु, एनेस्थीसिया प्रोफेसर की नियुक्ति पर लगी
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Thu, 09 Apr 2026
हाईकोर्ट ने पटेल यूनिवर्सिटी मंडी में चल रहे एक बीएड संस्थान में पढ़ाई कर रहे सैकड़ों प्रशिक्षुओं के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पटेल यूनिवर्सिटी मंडी में चल रहे एक बीएड संस्थान में पढ़ाई कर रहे सैकड़ों प्रशिक्षुओं के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षु अपनी पसंद के संस्थानों में परीक्षा दे सकते हैं और यदि वे चाहें तो अपने पुराने संस्थान में अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।इस मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी। अदालत ने प्रशिक्षुओं के हितों की रक्षा करते हुए निर्देश दिए हैं कि जो प्रशिक्षु अपने वर्तमान संस्थान में बने रहना चाहते हैं, वे वहां पढ़ाई जारी रख सकते हैं। क्योंकि उनका सत्र सितंबर 2025 में शुरू हो चुका है। विद्यार्थी अपनी पसंद के केंद्रों पर परीक्षा दे सकेंगे।
राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि मंडी और कुल्लू जिलों के विभिन्न संस्थानों में परीक्षा दे रहे छात्रों की शिक्षा में कोई व्यवधान न आए।जिन छात्रों ने 1 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के तहत अन्य संस्थानों का विकल्प चुना है, वे वहां जा सकते हैं, लेकिन किसी पर दबाव नहीं बनाया जाएगा। दरअसल, एनसीटीई ने 2 फरवरी 2026 को पटेल यूनिवर्सिटी में चल रहे एक बीएड संस्थान की मान्यता रद्द कर दी थी, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने भी उसकी संबद्धता समाप्त कर दी। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और सिंगल जज ने 100 छात्रों को अन्य कॉलेजों में समायोजित करने का निर्णय लिया था। सैकड़ों छात्रों में से 91 छात्रों ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की। उनके वकील ने दलील दी कि एनसीटीई अधिनियम, 1993 की धारा 14(5) और 17(3) के अनुसार, यदि किसी संस्थान की मान्यता रद्द होती है, तो पाठ्यक्रम को बंद करने या संबद्धता समाप्त करने का प्रभाव अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होता है, न कि वर्तमान सत्र के बीच में। अदालत ने पाया कि यह कानूनी तथ्य सिंगल जज के संज्ञान में नहीं लाया गया था।















