हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जाधारियों के 1.60 लाख परिवार चुनाव से बाहर

Himachal Panchayat Election: हिमाचल में अवैध कब्जे करने वाले 1.60 लाख परिवार नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Thu, 09 Apr 2026
2003 में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए इन परिवारों ने सरकार को स्वघोषणा के साथ खुद अपने दस्तावेज दिए थे।
अवैध कब्जे स्वीकारने वाले 1.60 लाख लोग और उनके परिजन पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। 2003 में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए इन परिवारों ने सरकार को स्वघोषणा के साथ खुद अपने दस्तावेज दिए थे। इन लोगों की मिसलें काटी गई हैं। राज्य सरकार और चुनाव आयोग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेगा। 29 दिसंबर 2020 में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी पत्र जारी हुआ है। जब प्रत्याशी किसी भी पद के लिए नामांकन पर्चा भरेगा, चुनाव अधिकारी की ओर से उन्हें स्वयं सत्यापित फार्म दिया जाएगा। इसमें चिट्टे में संलिप्त, सहकारी बैंक से डिफाल्टर, लंबित ऑडिट रिकावरी और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न होने से संबंधित पांच कॉलम दिए होंगे। फार्म को स्वयं सत्यापित करने के बाद अगर इनमें से किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई होगी। प्रधान बनने के बाद भी जनप्रतिनिधियों को कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा।
3757 पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर किया है जारी
पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। राज्य की 3757 पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी कर दिए गए हैं और संबंधित दस्तावेज राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिए गए हैं। जिला प्रशासन और पंचायतीराज विभाग ने तय समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर ली है। राज्य निर्वाचन आयोग 20 अप्रैल को पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी करेगा। 31 मई से पहले पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव संपन्न करवाए जाने हैं।















