हिमाचल: न्यायपालिका ढांचे की उपेक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव तलब

हिमाचल: न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे की उपेक्षा पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, मुख्य सचिव किए तलब
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Sat, 09 May 2026
हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता न्यायिक ढांचा नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे की उपेक्षा और कम बजट आवंटन पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता न्यायिक ढांचा नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकार बुनियादी ढांचे के नाम पर खानापूर्ति कर रही है, जबकि चुनावी लाभ वाले विभागों को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्य सचिव को 20 मई को कोर्ट में पेश होने के आदेश
खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश आंकड़ों को वित्तीय बाजीगरी करार देते हुए कहा कि सरकार का ध्यान न्याय प्रणाली को मजबूत करने के बजाय आगामी चुनाव पर है। वित्त सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कहा कि न्यायपालिका के लिए पेश आंकड़े महज आंकड़ों का खेल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट 272.64 करोड़ (0.46 फीसदी) है, जबकि अगले वर्ष के लिए इसे 290.25 करोड़ (0.53 फीसदी) प्रस्तावित किया है।















