India-China Border Trade: शिपकी ला में 1697 से जारी सामान के बदले सामान का व्यापार

India-China Border Trade : शिपकी ला में आज भी सामान के बदले सामान, 1697 की परंपरा कायम
हिंदी टीवी न्यूज, रामपुर बुशहर।। Published by: Megha Jain Updated Mon, 03 Aug 2026
किन्नौर के शिपकी ला में भारत-चीन सीमा व्यापार आज भी 1697 की वस्तु विनिमय संधि के तहत संचालित हो रहा है। यहां नकद या डिजिटल भुगतान के बजाय सामान के बदले सामान का लेनदेन किया जाता है। छह साल बाद दोबारा शुरू हुए इस व्यापार में केवल सीमावर्ती गांवों के पंजीकृत व्यापारी हिस्सा ले रहे हैं। कारोबारी सीजन 30 नवंबर तक चलने की संभावना है।
आज दुनिया नकद से डिजिटल भुगतान तक पहुंच चुकी है, लेकिन भारत-चीन सीमा पर किन्नौर के शिपकी ला में सदियों पुरानी वस्तु विनिमय प्रणाली आज भी जारी है। छह साल बाद फिर शुरू हुए सीमा व्यापार में यहां न नकद चलता है, न ऑनलाइन भुगतान। 1697 में तिब्बत और बुशहर रियासत के बीच हुई संधि के अनुसार आज भी सामान के बदले सामान का लेनदेन होता है।
वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) वह व्यवस्था है जिसमें पैसे का उपयोग किए बिना एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु या सेवा का आदान-प्रदान किया जाता है।
आसान उदाहरण:
एक किसान 10 किलो गेहूं देकर बदले में 5 किलो चावल लेता है।
कोई व्यक्ति ऊन देकर बदले में नमक या सूखे मेवे लेता है।
यानी सामान के बदले सामान का लेनदेन ही वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाता है।
शिपकी ला में कैसे होती है?
किन्नौर के शिपकी ला सीमा व्यापार में आज भी यही परंपरा लागू है। यहां भारत और तिब्बत (चीन) के पंजीकृत व्यापारी सरकार द्वारा अनुमोदित वस्तुओं का नकद या डिजिटल भुगतान के बजाय वस्तुओं के बदले वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था 1697 की पारंपरिक संधि और आपसी विश्वास पर आधारित मानी जाती है।















