राम मंदिर में कर्मियों पर सख्ती, अंदर की बात लीक होने पर होगी कार्रवाई

राम मंदिर में नई लक्ष्मण रेखा: कर्मियों पर सख्ती, अंदर की बात बाहर गई तो कार्रवाई तय; पुजारियों पर भी शिकंजा
हिंदी टीवी न्यूज, अयोध्या। Published by: Megha Jain Updated Tue, 15 Sep 2026
राम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव हो गए हैं। राम मंदिर के कर्मचारियों पर सख्ती बढ़ गई है। अंदर की बात बाहर आने पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही फैसले और व्यवस्थाओं की जानकारी साझा करने पर रोक लग गई है। मंदिर में पुजारी मोबाइल का भी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। नियम तोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।
राम मंदिर परिसर में अब आंतरिक सूचनाओं के लीक होने पर पूरी तरह अंकुश लगाने की तैयारी है। मंदिर की व्यवस्था में बदलाव के साथ ट्रस्ट ने कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों और पुजारियों तक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परिसर के भीतर होने वाली गतिविधियों, व्यवस्थाओं और निर्णयों की जानकारी अनधिकृत रूप से बाहर नहीं जानी चाहिए।
इसे लेकर अब मंदिर प्रशासन का रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त नजर आ रहा है। ट्रस्ट की ओर से नई व्यवस्था में सूचना की गोपनीयता को प्राथमिकता दी गई है।
परिसर में तैनात कर्मचारियों को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि मंदिर के भीतर क्या हो रहा है, कौन सा निर्णय लिया गया, किस स्तर पर क्या व्यवस्था चल रही है या प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी बाहर साझा न की जाए।
खासतौर पर ऐसी सूचनाएं जो मंदिर की आंतरिक व्यवस्था से जुड़ी हैं, उन्हें सार्वजनिक करने से बचने को कहा गया है। नई व्यवस्था के बाद राम मंदिर परिसर में ‘जो अंदर है, वह बाहर नहीं जाएगा’ के सिद्धांत पर निगरानी और अनुशासन को मजबूत किया जा रहा है।
नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को भी ट्रस्ट की ओर से परिसर की आंतरिक गतिविधियों की गोपनीयता बनाए रखने के संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं। सीईओ ने भी कार्यभार संभालने के बाद मंदिर से जुड़े कर्मचारियों को अनधिकृत रूप से सूचना साझा नहीं करने और व्यवस्था की गोपनीयता बनाए रखने की नसीहत दी है।
पुजारियों पर भी शिकंजा, मोबाइल पर रोक
गणना व्यवस्था में बदलाव, कपड़े और तलाशी पर सख्ती
- गिनती करने वालों के लिए बिना जेब वाली आसमानी गाउन अनिवार्य कर दी गई है। चेंजिंग रूम अलग बनाया गया है।
- एंट्री और एग्जिट दोनों जगह सख्त तलाशी, मोबाइल और निजी सामान लॉकर में जमा कराना अनिवार्य।
- गिनती के दौरान आपस में बात करना बंद, टेबल-कुर्सी पर नहीं, अब फर्श पर प्लाईवुड बिछा कर गिनती ताकि नोट छिपाए न जा सकें।
- गिनती कक्ष में 13 नए सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरे लगाए गए हैं, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है।
- दान पेटी से लेकर गिनती कक्ष तक एसबीआई अधिकारी सील लगाते हैं, फिर गिनती शुरू होती है।
- निजी सुरक्षा कर्मी 300 से बढ़ा कर 350 किए गए, 27 अतिरिक्त एसआईएस कर्मी दान पेटी को काउंटिंग सेंटर तक ले जाने के लिए लगाए गए।
- कंट्रोल रूम की पूरी टीम बदल दी गई, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नई टीम बनाई है। पास और बैंकिंग सिस्टम में भी बदलाव।
राम मंदिर के पहले सीईओ के चयन पर उठे सवाल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने सीईओ चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगा है।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ट्रस्ट से मांगा स्पष्टीकरण
ठाकुर ने ट्रस्ट को भेजे पत्र में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय के एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान का हवाला दिया है। पत्र के अनुसार, पांडेय ने दावा किया है कि जितेंद्र मिश्र सीईओ पद के लिए चुने गए अंतिम 16 अभ्यर्थियों में शामिल नहीं थे।
विवेचक ने आख्या दाखिल करने के लिए मांगा पांच दिन का समय
राम जन्म भूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी के आरोपी अनुकल्प मिश्रा,लव कुश मिश्रा व करुणेश पांडेय की जमानत अर्जी पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो पाई। मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए जमानत अर्जी पर प्रस्तर वार आख्या दाखिल करने के लिए पांच दिन का समय प्रदान किए जाने की कोर्ट से मांग की गई।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के तीन आरोपियों की जमानत पर नहीं हुई सुनवाई, अब 17 को होगी
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट रजत वर्मा ने विवेचक आशुतोष तिवारी के आख्या पेश के जाने के लिए मौका प्रदान किए जाने के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए जमानत पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 17 सितंबर की नियत कर दिया। साथ ही केस डायरी के साथ आख्या तलब किया है।
इसके पहले भी रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव व अविनाश शुक्ला के जमानत प्रार्थना पत्र पर 11 सितंबर को सुनवाई के दौरान विवेचक ने अपनी आख्या कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई थी। जिस कारण से आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र का निस्तारण नहीं हो पाया था और सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख नियत की गई थी।















