एम्स बिलासपुर में दिल की धमनियों का इलाज, डायमंड ड्रिल तकनीक से राहत

AIIMS Bilaspur: दिल का ख्याल रखेगा एम्स बिलासपुर, डायमंड ड्रिल से साफ होंगी धमनियां; मरीजों को मिलेगी राहत
हिंदी टीवी, बिलासपुर। Published by: Megha jain Updated Sat, 27 Dec 2025
धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण जिन मरीजों को बाहरी राज्यों के चक्कर काटने पड़ते थे उन्हें एम्स बिलासपुर में बड़ी राहत मिलेगी।
एम्स बिलासपुर के हृदय रोग विभाग ने दिल की धमनियों में जमा होने वाले पत्थर जैसे कठोर कैल्शियम को हटाने के लिए दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मशीन उन हजारों मरीजों के लिए जीवनदान साबित होगी, जिन्हें धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण अब तक इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे बाहरी राज्यों के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते थे। इसके लिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम को आम बोलचाल में डायमंड ड्रिल कहा जाता है, क्योंकि इसकी कार्यप्रणाली किसी बारीक ड्रिल मशीन जैसी है। इस मशीन के आगे एक छोटा बर लगा होता है, जिस पर असली हीरे के सूक्ष्म कणों की कोटिंग होती है। हीरा दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है, इसलिए यह धमनी के अंदर मौजूद पत्थर जैसे सख्त कैल्शियम को आसानी से घिस सकता है। यह ड्रिल धमनियों के अंदर 1.5 लाख से 1.8 लाख प्रति मिनट चक्कर की तूफानी गति से घूमती है और कठोर ब्लॉकेज को बारीक पाउडर की तरह पीस देती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल कठोर कैल्शियम को काटती है, जबकि दिल की नसों की कोमल दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।














