हरियाणा: विशेषज्ञ डॉक्टर अब सिविल अस्पतालों में तैनात रहेंगे

Haryana: पीजी के बाद अब सिविल अस्पतालों में ही रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, नॉन-क्लीनिकल डॉक्टर कॉलेजों में रहेंगे
हिंदी टीवी न्यूज, चंडीगढ़। Published by: Megha Jain Updated Wed, 03 Jun 2026
हरियाणा में हाल के वर्षों में कई नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं। इससे योग्य शिक्षकों की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार का मानना है कि नई नीति से मेडिकल कॉलेजों को प्रशिक्षित फैकल्टी मिलेगी और अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर भी बने रहेंगे।
हरियाणा सरकार ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने और मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) करने वाले सरकारी डॉक्टरों की नीति में बड़ा बदलाव किया है।
नई व्यवस्था के तहत क्लीनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों को अब मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड नहीं भरना होगा। यानी पीजी करने के बाद वे सिविल अस्पताल में ही कार्यरत रहेंगे। उन्हें मेडिकल कॉलेज में नहीं रहना होगा। इससे जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी नहीं होगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी। यह छूट हरियाणा सिविल डेंटल सर्विस के अधिकारियों को भी मिलेगी।
जबकि नॉन-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों को तीन साल तक मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं देनी होंगी। यानी एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के संस्थानों में तीन साल तक अध्यापन कार्य करना होगा।
निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद उन्हें विभाग में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प भी दिया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह बदलाव वर्ष 2022 में बनाई गई उस नीति में किया गया है, जिसके तहत सरकारी सेवा में रहते हुए डॉक्टरों को हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित सीटों पर पीजी करने का अवसर दिया जाता है।
दरअसल, हरियाणा में हाल के वर्षों में कई नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं। इससे योग्य शिक्षकों की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार का मानना है कि नई नीति से मेडिकल कॉलेजों को प्रशिक्षित फैकल्टी मिलेगी और अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर भी बने रहेंगे। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन बनाना है, ताकि दोनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूत किया जा सके।
डॉक्टरों को तीन साल तक मेडिकल कॉलेज में देनी पड़ती थी सेवाएं
पुरानी नीति के मुताबिक इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए पीजी पाठ्यक्रमों में 40 प्रतिशत तक आरक्षण उपलब्ध है। आरक्षण का लाभ लेकर पीजी करने वाले डॉक्टरों को पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन वर्ष तक मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में सेवा देना अनिवार्य था।
इससे अस्पताल के डॉक्टर तीन साल के लिए मेडिकल कॉलेज में सेवा के लिए बाध्य हो जाते थे। इससे अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी होने लगती थी। नई नीति के तहत डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देनी नहीं पड़ेगी। हालांकि इस फैसले से मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टर कम हो जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की यह मांग काफी पुरानी थी।















