हिमाचल: तृतीय श्रेणी कर्मियों को पेंशन में दैनिक वेतन सेवा का लाभ मंजूर

हिमाचल: तृतीय श्रेणी कर्मियों को भी मिलेगा पेंशन के लिए दैनिक वेतन भोगी सेवा का लाभ, सरकार की अपील खारिज
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 05 May 2026
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें एक तृतीय कर्मचारी को पेंशन लाभ देने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें एक तृतीय कर्मचारी को पेंशन लाभ देने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दैनिक वेतन भोगी सेवा की गणना का लाभ अब केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक सीमित नहीं है। अदालत ने एकल पीठ के उस निर्देश को बरकरार रखा, जिसमें सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के पेंशन लाभों पर विचार करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार स्थापित कानूनी सिद्धांतों से बंधी है और यह अपील तथ्यों और कानून के आधार पर पूरी तरह से निराधार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि नियमित सेवा पेंशन की अवधि (10 वर्ष) से कम पड़ती है, तो पिछले दैनिक वेतन भोगी कार्यकाल को जोड़कर कर्मचारी की पात्रता तय की जानी चाहिए।
यहां जानें पूरा मामला
प्रतिवादी राजू राम वर्ष 1992 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्त हुए थे। 1 जनवरी 2002 से उनकी सेवाओं को नियमित किया गया। 28 फरवरी 2011 को वह सेवानिवृत्त हो गए। उनकी नियमित सेवा केवल 9 साल और 2 महीने थी, जो पेंशन के लिए अनिवार्य 10 साल की सेवा से कम थी। सरकार ने दलील दी थी कि सुंदर सिंह और बालो देवी मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (जिसमें 50 फीसदी दैनिक सेवा को पेंशन के लिए जोड़ने की बात थी) केवल क्लास फोर कर्मचारियों के लिए थे, क्लास-तीन के लिए नहीं। हाईकोर्ट ने सरकार के तर्क को भ्रामक बताते रूप लाल बनाम हिमाचल राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि दैनिक वेतन भोगी सेवा का लाभ अब क्लास थ्री कर्मचारियों को भी देय है। चूंकि राजू राम की नियमित सेवा 10 साल से कम थी, इसलिए उनके 1992 से 2002 तक के दैनिक सेवा काल का लाभ दिया जाना अनिवार्य है।
शिक्षकों और कर्मचारियों के रोके गए सेवा लाभ बहाल करने के दिए आदेश
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि 28 मार्च 2025 के उस विवादास्पद कार्यालय आदेश के कारण जिन कर्मचारियों के सेवा लाभ रोक दिए गए या वापस ले लिए गए थे, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने प्रतिवादी राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे याचिकाकर्ताओं और उनके जैसे अन्य सभी प्रभावित कर्मचारियों को 30 जून 2026 तक सभी देय सेवा लाभ प्रदान करना सुनिश्चित करें। अमित कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में गुहार लगाई थी कि सरकार ने 2024 के नए अधिनियम का हवाला देते हुए उनके उन सेवा लाभों को वापस ले लिया था, जो उन्हें वर्षों पहले अदालती आदेशों के आधार पर मिले थे। सरकार ने अब अपनी गलती सुधारते हुए स्वीकार किया है कि पुराने डीम्ड रेगुलाइजेशन के मामलों पर नया कानून प्रभावी नहीं होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 उन मामलों पर लागू नहीं होगा जो एक दशक पहले ही कोर्ट द्वारा तय किए जा चुके हैं। सरकार ने माना कि पुराने स्वीकृत निर्णयों (जैसे कुलदीप चंद और अजय कुमार मामले) को इस नए कानून की आड़ में दोबारा नहीं खोला जा सकता।














