हिमाचल में कोरोनाकाल के बाद बच्चों में बढ़ गए नेत्ररोग

हिमाचल में कोरोनाकाल के बाद बच्चों में बढ़ गए नेत्ररोग
कोरोना महामारी ने बच्चों की आंखों की सेहत पर गहरा असर डाला है। आईजीएमसी शिमला के नेत्र रोग विभाग के अनुसार, महामारी से पहले रोजाना 20 से 25 बच्चे आंखों की जांच के लिए अस्पताल आते थे, लेकिन अब यह संख्या 40 से 50 तक पहुंच चुकी है। आंकड़ों के अनुसार बच्चों में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है।वर्ष 2018 में जहां 18 वर्ष से कम आयु के 3967 बच्चे नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में आए थे, वहीं यह संख्या 2022 में बढ़कर 5877 हो गई। यानी चार साल में बच्चों के नेत्र रोगियों में करीब 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2023 में यह आंकड़ा 7262 तक पहुंच गया, जो 2018 की तुलना में लगभग 83 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कोविडकाल के बाद से बच्चों में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और ज्यादा हो सकती है।यह वृद्धि बच्चों के बढ़े हुए स्क्रीन टाइम की वजह से हुई है। पहले बच्चे औसतन 3.5 घंटे रोजाना स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, लैपटॉप) का इस्तेमाल करते थे। अब यह बढ़कर 8 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर प्रकाशित शोध में कहा गया है कि 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी मायोपिक होगी। भारत में भी यही रुझान देखा जा रहा है। एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा के विशेषज्ञों ने हाल में चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में आधे भारतीय बच्चे मायोपिया से ग्रस्त हो सकते हैं और स्कूल जाने वाले बच्चों का 50% हिस्सा मायोपिया का मरीज बन जाएगा।














