हिमाचल मौसम: आज-कल भारी बारिश-बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट

Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश में आज और कल भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट, जानें पूरी अपडेट
हिंदी टीवी, शिमला/धर्मशाला। Published by: Megha Jain Updated Thu, 19 Mar 2026
हिमाचल प्रदेश में वीरवार और शुक्रवार को छह जिलों में भारी बारिश व बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, हिमपात के चलते पुलिस प्रशासन ने अटल टनल की ओर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार रात और बुधवार को रुक-रुककर चोटियों पर बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश होती रही। अटल टनल, रोहतांग और धुंधी, लाहौल और किन्नौर की चोटियों पर बर्फबारी हुई। हिमपात के चलते पुलिस प्रशासन ने अटल टनल की ओर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।
सुबह नेहरूकुंड में ही सभी वाहन रोके गए। उधर, तीन दिन बाद जलोड़ी दर्रे से होकर शुरू की गई वाहनों की आवाजाही शाम को बर्फबारी के चलते फिर से बंद करनी पड़ी। कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति की ऊंची चोटियों पर बुधवार को भी हिमपात हुआ। हिमाचल प्रदेश में वीरवार और शुक्रवार को छह जिलों में भारी बारिश व बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि किन्नौर को छोड़कर अन्य पांच जिलों में येलो अलर्ट रहेगा।
इसके अलावा कई क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऊपरी शिमला, किन्नौर और कुल्लू जिले के आउटर सिराज क्षेत्र में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे, वहीं शाम से मौसम बिगड़ गया। निचले क्षेत्रों में बारिश शुरू हुई। ऊना जिले में बुधवार सुबह से बादल छाए रहे।
दिनभर ठंडी हवाएं चलती रहीं। दोपहर के समय कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई। बुधवार सुबह से रोहतांग दर्रा, बारालाचा, शिंकुला और कुंजम दर्रा में रुक-रुक बर्फबारी हो रही है। दोपहर बाद अटल टनल के साथ कोकसर, घेपन पीक, बड़ा और छोटा शिगरी ग्लेशियर और चंद्रा घाटी में बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ गई। मनाली से केलांग के बीच यातायात भी छोटे वाहनों के लिए बहाल कर दिया गया है। कुल्लू में 11 सड़कें और बिजली के 11 ट्रांसफार्मर बंद हैं। लाहौल स्पीति में 134 सड़कों के साथ 15 ट्रांसफॉर्मर ठप रहे।
40 से 50 किमी की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं कई क्षेत्रों में
हिमपात के चलते पुलिस प्रशासन ने अटल टनल की ओर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। सुबह नेहरूकुंड में ही सभी वाहन रोके गए। तीन दिन बाद जलोड़ी दर्रे से होकर शुरू की गई वाहनों की आवाजाही शाम को फिर से बंद करनी पड़ी।















