हिमाचल: स्पीति में कुत्तों से बदली जंगल की घड़ी, देर रात सक्रिय हो रही लाल लोमड़ी

हिमाचल: स्पीति में कुत्तों ने बदल दी जंगल की घड़ी, देर रात ज्यादा सक्रिय हो रही लाल लोमड़ी; जानें विस्तार से
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Mon, 21 Sep 2026
ति की ऊंची पहाड़ियों में इंसानी गतिविधियों और आवारा कुत्तों की मौजूदगी वन्यजीवों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आया कि कुत्तों वाले क्षेत्रों में लाल लोमड़ी रात के शुरुआती घंटों में कम और देर रात ज्यादा सक्रिय होती है। वहीं, मानव गतिविधियों वाले इलाकों में हिम तेंदुए की सक्रियता में भी बदलाव देखा गया। शोधकर्ताओं ने 205 कैमरा ट्रैप के जरिए कुल 8,119 कैमरा-दिन का आंकड़ा जुटाया।
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी की ऊंची और ठंडी पहाड़ियों में वन्यजीवों की दुनिया की ‘घड़ी’ इंसानी दखल के साथ बदलती नजर आ रही है। जंगल में मौजूद आवारा कुत्तों और बढ़ती मानव गतिविधियों का असर अब वन्यजीवों के रहने के साथ-साथ उनके सक्रिय होने के समय पर भी दिखाई दे रहा है।
शोधकर्ताओं ने स्पीति घाटी के चंद्रताल, किब्बर, पिन घाटी, माने और ग्यू क्षेत्रों में कुल 205 कैमरा ट्रैप लगाए। निगरानी दो चरणों में की गई। पहला चरण 25 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2022 तक चला, जबकि दूसरा चरण 25 मई 2022 से 14 अगस्त 2022 तक चला। इस दौरान कुल 8,119 कैमरा-दिन का आंकड़ा जुटाया गया। कैमरों में लाल लोमड़ी के 770, आवारा कुत्तों के 220, हिम तेंदुए के 161 और हिमालयी भेड़िये के 79 रिकॉर्ड दर्ज हुए। इन रिकॉर्ड के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि अलग-अलग मांसाहारी जीव किन क्षेत्रों को पसंद करते हैं और एक-दूसरे या इंसानों की मौजूदगी में उनकी गतिविधियों के समय में किस तरह बदलाव आता है।
अध्ययन का सबसे दिलचस्प पहलू लाल लोमड़ी और आवारा कुत्तों के बीच दिखाई देने वाला संबंध है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी थी, वहां लाल लोमड़ी रात के शुरुआती हिस्से में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रही। इसके बजाय उसकी गतिविधियां रात के बाद के हिस्से में ज्यादा दिखाई दीं।
शोधकर्ताओं ने इसे समय के स्तर पर दूरी बनाने की संभावित रणनीति के रूप में देखा है। आसान भाषा में कहें तो लाल लोमड़ी और कुत्ते एक ही इलाके में मौजूद होने के बावजूद एक ही समय पर सक्रिय होने से बच सकते हैं। इस तरह के व्यवहार से दोनों के बीच सीधे टकराव और भोजन को लेकर प्रतिस्पर्धा की संभावना कम हो सकती है। यानी इलाके की जगह वही रहने के बावजूद गतिविधियों का समय बदलकर लाल लोमड़ी अपने लिए अलग ‘समय’ चुन रही है।
अध्ययन में मानव गतिविधियों का असर हिम तेंदुए पर भी दिखाई दिया। शोधकर्ताओं ने अधिक मानव प्रभाव वाले क्षेत्रों में हिम तेंदुए की सक्रियता में बदलाव दर्ज किया। अध्ययन के अनुसार इसकी एक संभावित वजह मानव प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन या अन्य संभावित शिकार की उपलब्धता हो सकती है। ऐसे में इंसानों की मौजूदगी वाले क्षेत्र हिम तेंदुए को भोजन की तलाश में आकर्षित कर सकते हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि कुछ परिस्थितियों में बस्तियों से दूरी बढ़ने पर हिम तेंदुए की उपस्थिति घटती है। इसी तरह सड़कों से दूरी बढ़ने पर भी उसकी उपस्थिति में कमी देखी गई। यह निष्कर्ष बताता है कि स्पीति जैसे संवेदनशील ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र में मानव गतिविधियां केवल वन्यजीवों के रहने वाले क्षेत्रों को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि उनके व्यवहार और सक्रियता के समय को भी बदल सकती हैं।
स्पीति के जंगल में बदल रही है वन्यजीवों की दिनचर्या
इस अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें केवल यह नहीं देखा गया कि वन्यजीव कहां मौजूद हैं, बल्कि यह भी समझने की कोशिश की गई कि वे कब सक्रिय होते हैं। लाल लोमड़ी का कुत्तों की मौजूदगी में अपनी सक्रियता का समय बदलना और मानव गतिविधियों वाले क्षेत्रों में हिम तेंदुए की सक्रियता में बदलाव यह संकेत देता है कि वन्यजीव अपने आसपास बदलती परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार में परिवर्तन कर सकते हैं।















