मनरेगा संशोधन के खिलाफ प्रस्ताव पास, कांग्रेस का हंगामा

पंजाब विधानसभा विशेष सत्र: मनरेगा के संशोधन बिल के खिलाफ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास, कांग्रेस का हंगामा
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी,चमोली। Published by: Megha Jain Updated Wed, 31 Dec 2025
सदन में मनरेगा के संशोधन बिल के खिलाफ संसदीय मंत्री तरुणप्रीत सौंद ने जो प्रस्ताव रखा था, उस पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने अपने विचार रखते हुए इस विरोध प्रस्ताव का समर्थन किया। स्पीकर ने अन्य विधायकों की राय पूछने के बाद इस विरोध प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया।
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को मनरेगा के संशोधन बिल के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। आप और कांग्रेस के विधायकों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।
कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री समेत आप विधायकों को ऑफर दिया कि वे इस मसले पर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करें, वे उनके साथ चलेंगे। उधर सदन में बोलने का पर्याप्त समय न मिलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेसी विधायकों ने वेल में आकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री और स्पीकर उन्हें शांत करवाते हुए कार्यवाही को बाधित न करने का आग्रह करते रहे मगर उनका हंगामा जारी रहा। इस दौरान आप विधायक भी अपनी सीटों से उठकर कांग्रेसियों का विरोध करने लगे।
अंतत: स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को नेम कर सदन से बाहर जाने को कहा। इस पर खैहरा ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर की चेतावनी के बावजूद जब वे नहीं माने तो स्पीकर ने उन्हें मार्शल की मदद से सदन से बाहर करवा दिया। उधर अन्य कांग्रेसी वेल में ही खड़े रहे। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आग्रह पर वे अपनी सीटों पर बैठे और सदन की कार्यवाही फिर सुचारू हुई।
सदन में मनरेगा के संशोधन बिल के खिलाफ संसदीय मंत्री तरुणप्रीत सौंद ने जो प्रस्ताव रखा था, उस पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने अपने विचार रखते हुए इस विरोध प्रस्ताव का समर्थन किया। स्पीकर ने अन्य विधायकों की राय पूछने के बाद इस विरोध प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया। इस प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। सदन में आम आदमी पार्टी के विधायक अपने-अपने हलकों से इस संशोधन बिल के खिलाफ मजदूरों से फार्म भरवाकर लाए थे। स्पीकर ने दावा किया कि सदन में लगभग 10 लाख फार्म पहुंचे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार को भिजवा दिया जाएगा।
इससे पहले आप और कांग्रेसी विधायकों ने चर्चा के दौरान मनरेगा के संशोधन बिल के खिलाफ अपने विचार रखे। सदन में भाजपा के विधायक व कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि इस मसले पर पंजाब सरकार मजदूरों और पंजाबियों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बिल पूरे देश के लिए है, जिसमें मजदूरों की दिहाड़ी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इस योजना को प्रदेश में प्रभावशाली व ईमानदारी ढंग से लागू करवाने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकारों की होती है मगर पंजाब सरकार इसका लाभ मजदूरों को नहीं दे पाई और न ही दो साल से इस योजना सोशल ऑडिट हुआ है।
मान सरकार पर भड़के शिवराज सिंह चौहान
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मनरेगा संशोधन बिल के खिलाफ प्रस्ताव लाने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मान सरकार पर निशाना साधा है। चाैहान ने कहा कि संसद द्वारा पारित किसी कानून के खिलाफ राज्य विधानसभा में प्रस्ताव लाना संघीय ढांचे की मूल भावना के खिलाफ है।
संविधान ने संसद को कानून बनाने का अधिकार दिया है और उसे मानना केंद्र व राज्य, दोनों की जिम्मेदारी है। केवल विरोध के लिए विरोध करना न तो लोकतांत्रिक है और न ही संवैधानिक।
चाैहान ने कहा कि मैं हैरान हूं कि कुछ लोग किस कल्पना लोक में रहते हैं, देश की हकीकत से उनका कोई लेना-देना नहीं है। बिना मंत्री और कैबिनेट के काम चलने की बात कहना केवल भ्रम फैलाना है, मन में जो आया कह देना, जिम्मेदार राजनीति नहीं है।
मनरेगा खत्म करना केंद्र सरकार का गरीबों और दलितों के खिलाफ फैसला
स्पेशल सेशन के दौरान पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनहितैषी योजना को खत्म कर केंद्र सरकार ने देश के गरीबों और मजदूर वर्ग की रोज़ी-रोटी छीन ली है। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों के लिए जीवन रेखा है।
पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि भाजपा की नीतियां 100 प्रतिशत दलित विरोधी हैं और भाजपा दलित समाज का भरोसा पूरी तरह खो चुकी है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी दलितों के अधिकारों को खत्म करती है, उसे दलित समाज से वोट मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
मनरेगा को खत्म करने की साजिश: अरोड़ा
इस पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री व आप के प्रदेशाध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि संशोधन बिल मनरेगा को खत्म करने की बड़ी साजिश है। इससे प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंंने कहा कि इस योजना के तहत अभी तक केंद्र सरकार ने पंजाब के 350 करोड़ रुपये रोक रखे हैं, जब मजदूरों को दिहाड़ी ही नहीं मिलेगी तो वे काम क्यों करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा।















