हिमाचल: पेंशन के मौद्रिक लाभ जनवरी 2018 से देने की मंजूरी

हिमाचल: राज्य सरकार को पेंशन के वास्तविक मौद्रिक लाभ जनवरी 2018 से देने की मिली छूट
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Wed, 06 May 2026
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार बनाम भीमा राम मामले में पेंशन लाभ प्रदान करने की प्रभावी तिथि को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार बनाम भीमा राम मामले में पेंशन लाभ प्रदान करने की प्रभावी तिथि को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फिलहाल राहत देते हुए पेंशन लाभ के वास्तविक मौद्रिक लाभ 1 जनवरी 2018 से देने की छूट प्रदान की है न कि सेवानिवृत्ति तिथि से। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह याचिकाकर्ता को पेंशन लाभ देने के लिए तैयार है, लेकिन मुख्य विवाद उस तिथि को लेकर है जिससे ये लाभ देय होंगे। एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता को उसकी सेवानिवृत्ति की तिथि यानी 12 जुलाई 2012 से वास्तविक मौद्रिक पेंशन लाभ दिए जाएं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत बकाया राशि (एरियर) का भुगतान रिट याचिका दायर करने की तिथि से ठीक तीन वर्ष पहले की अवधि तक ही सीमित रखा है।
राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से सुंदर सिंह मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि याचिका दायर करने से तीन साल पहले की अवधि से वास्तविक लाभ दिए जाएंगे। इससे पहले के पेंशन लाभ केवल नोशनल आधार पर दिए जाएंगे। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद, खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस चरण में 1 जनवरी 2018 से पेंशन लाभ प्रदान करने की स्वतंत्रता दे दी है। साथ ही प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 24 जून को निर्धारित की गई है।पेंशन लाभ की तिथि पर कानूनी पेंच अभी भी बरकरार है। राज्य सरकार ने एकल जज के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी है।















