Chandigarh: रॉयल एस्टेट ग्रुप पर ईडी की कार्रवाई, गमाडा से 5 साल के सीएलयू रिकॉर्ड मांगे

Chandigarh: रॉयल एस्टेट ग्रुप पर कसा ईडी का शिकंजा, गमाडा से पांच साल के सीएलयू रिकॉर्ड तलब
हिंदी टीवी न्यूज ,चंडीगढ़। Published by: Megha Jain Updated Fri, 29 May 2026
मामला चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की बकाया राशि जानबूझकर जमा नहीं करवाई और करीब 32.67 करोड़ रुपये के बाउंस चेक जारी किए।
रॉयल एस्टेट ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत ईडी ने रॉयल एस्टेट ग्रुप और चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (सीआरसीपीएल) से जुड़े 18 बैंक खातों की 286 संदिग्ध एंट्रीज की जांच तेज कर दी है। एजेंसी इन लेनदेन के जरिये निवेशकों के पैसे को दूसरी जगह खपाने और मनी ट्रेल से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं जिनमें रकम को अलग-अलग खातों और संपत्तियों में निवेश किए जाने के संकेत मिले हैं। इसी क्रम में रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण कंसल उर्फ रॉकी के बैंक रिकॉर्ड भी ईडी ने जांच के दायरे में ले लिए हैं।
यह पूरा मामला चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की बकाया राशि जानबूझकर जमा नहीं करवाई और करीब 32.67 करोड़ रुपये के बाउंस चेक जारी किए।
जांच अब केवल वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं रही। ईडी ने गमाडा से पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए सभी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मामलों का रिकॉर्ड भी तलब कर लिया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किन परियोजनाओं को नियमों को दरकिनार कर मंजूरी दी गई और इससे सरकार को कितना वित्तीय नुकसान हुआ।
सूत्रों का कहना है कि ईडी ने मौजूदा अधिकारियों के साथ-साथ उन पूर्व अधिकारियों की जानकारी भी मांगी है जिनके कार्यकाल में विवादित सीएलयू मंजूर किए गए थे। कई पूर्व अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी भी चल रही है। जांच एजेंसी का फोकस उन बड़े बिल्डरों और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर है जिनके खिलाफ निवेशकों और जमीन मालिकों की शिकायतें पहले से सामने आती रही हैं।
पांच वर्षों में जारी सीएलयू पर उठ रहे सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में 50 से अधिक सीएलयू ऐसे जारी किए गए जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या कुछ बिल्डरों को एक के बाद एक कई परियोजनाओं की मंजूरी दी गई जबकि अन्य मामलों में नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। शिकायतों को नजरअंदाज कर परियोजनाओं को फायदा पहुंचाने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
रॉयल एस्टेट, सनटेक और अल्टस प्रोजेक्ट की जांच जारी
ईडी की मौजूदा जांच रॉयल एस्टेट ग्रुप, सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स से जुड़े मामलों पर केंद्रित है। आरोप है कि कुछ परियोजनाओं में फर्जी दस्तावेजों और गलत सहमति पत्रों के आधार पर सीएलयू हासिल किए गए। हाल ही में जांच एजेंसी ने कई ठिकानों पर छापा मारकर नकदी और अहम दस्तावेज भी बरामद किए थे। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कई और बड़े बिल्डरों, हाउसिंग ग्रुप्स और उनसे जुड़े लोगों के यहां ईडी की कार्रवाई हो सकती है। एजेंसी अब पूरे रियल एस्टेट नेटवर्क, मंजूरियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर बड़े स्तर पर जांच आगे बढ़ा रही है।















