हिमाचल: कान-हड्डियों की टीबी के मामले बढ़े, 60% मरीज फेफड़ों के रोगी

स्वास्थ्य: हिमाचल में कान और हड्डियों की टीबी के मरीज भी आ रहे सामने, 60 फीसदी मरीजों में फेफड़ों का क्षय रोग
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Wed, 03 Jun 2026
टीबी केवल फेफड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार गिल्टियों (लिंफ नोड्स) में सूजन, लगातार बुखार, अचानक वजन कम होना, भूख न लगना और रात में पसीना आना भी टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। हिमाचल प्रदेश में फेफड़ों की टीबी के बाद सबसे अधिक मामले लिंफ नोड्स टीबी के सामने आ रहे हैं।
खांसी ही नहीं, शरीर के किसी हिस्से में अगर गिल्टी है और उसमें सूजन है तो यह भी टीबी का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही बुखार आना, अचानक वजन कम होना, भूख न लगना और रात में पसीना आना भी टीबी के लक्षण हैं।
हिमाचल प्रदेश में फेफड़ों के क्षय रोग के बाद दूसरे नंबर पर गिल्टियों (लिंफ नोड्स) में टीबी के मामले सामने आ रहे हैं। कान और हड्डियों की टीबी के मरीज भी मिल रहे हैं। हालांकि शरीर के इन हिस्सों में क्षय रोग के मामले काफी कम हैं। प्रदेश में टीबी के सबसे अधिक 60 फीसदी मामले फेफड़ों से जुड़े हैं, जबकि 10 फीसदी मामले गिल्टियों की टीबी के हैं। इन मामलों का उपचार प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
इसके अतिरिक्त शेष 40 फीसदी मामले शरीर के अलग-अलग अंगों जैसे स्किन (त्वचा), लिवर, आंत, बच्चेदानी और किडनी आदि में बंटे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब सभी प्रकार के क्षय रोग को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा है। चिकित्सकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति फेफड़ों की टीबी से ग्रसित मरीज के संपर्क में आता है, तो उसे फेफड़ों के साथ-साथ शरीर के अन्य हिस्सों में भी क्षय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच करवाएं।















