हिमाचल: बेटी से दुष्कर्म के प्रयास में पिता को 20 साल की सजा

Himachal News: नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के प्रयास में पिता को 20 साल की कठोर कैद, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी
हिंदी टीवी न्यूज, चंबा। Published by: Megha Jain Updated Tue, 07 Jul 2026
चंबा की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बेटी से यौन अपराध के मामले में दोषी पिता को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने 19 गवाहों और अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
विशेष न्यायाधीश चंबा अनुजा सूद की अदालत ने नाबालिग से यौन अपराध के मामले में दोषी पिता को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे दो माह का साधारण कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा, धर्मशाला ने वाहन बीमा दावा खारिज करने के मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 1,16,418 रुपये की दावा राशि शिकायत दायर होने की तिथि से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा कंपनी को 10 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 7,500 रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी अदा करना होगा। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने यह फैसला अनिल कुमार निवासी गांव सातैन डाकघर प्रीणा जिला चंबा की शिकायत पर सुनाया।
शिकायत के अनुसार अनिल कुमार की महिंद्रा बोलेरो कैंपर का बीमा 11 मार्च, 2022 से 10 मार्च, 2023 तक ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के पास था। 24 दिसंबर, 2022 को भरमौर क्षेत्र में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने तुरंत पुलिस और बीमा कंपनी को सूचना दी और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ बीमा दावा भी जमा कर दिया। बावजूद इसके कंपनी ने लंबे समय तक दावा नहीं निपटाया और बाद में उसे खारिज कर दिया। बीमा कंपनी ने दलील दी कि दुर्घटना के समय वाहन में तय संख्या से अधिक लोग सवार थे। चालक के पास वाणिज्यिक वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था। इसलिए दावा अस्वीकार किया गया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी के सर्वेक्षक ने वाहन को हुई क्षति का आकलन 1,16,418 रुपये किया था। आयोग ने कहा कि सर्वेक्षक की रिपोर्ट के विपरीत कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। ऐसे में दावा खारिज करना उचित नहीं था और यह सेवा में कमी का मामला है। इसी आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को दावा राशि ब्याज सहित तथा मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने के आदेश दिए।















