Chandigarh: मॉडल व पीएम श्री स्कूलों के लिए नई शिक्षक तैनाती नीति

Haryana: मॉडल संस्कृति, पीएम श्री और सीएमईईई स्कूलों के लिए नई शिक्षक तैनाती नीति लागू
हिंदी टीवी न्यूज, चंडीगढ़। Published by: Megha Jain Updated Fri, 31 Jul 2026
नई नीति के अनुसार स्क्रीनिंग के माध्यम से नियुक्त शिक्षक एक ही जीएमएस, पीएम श्री या सीएमईईई विद्यालय में अधिकतम 10 वर्ष, जबकि सामान्य स्थानांतरण से पहुंचे शिक्षक अधिकतम 5 वर्ष तक रह सकेंगे।
हरियाणा सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति, पीएम श्री और सीएमईईई स्कूल शिक्षक तैनाती नीति-2026 लागू कर दी है। यह नीति 30 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी और शिक्षक स्थानांतरण नीति-2026 की उप-नीति के रूप में लागू रहेगी। इसका उद्देश्य उत्कृष्ट विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की पारदर्शी और मेरिट आधारित तैनाती सुनिश्चित करना है।
नई नीति के अनुसार स्क्रीनिंग के माध्यम से नियुक्त शिक्षक एक ही जीएमएस, पीएम श्री या सीएमईईई विद्यालय में अधिकतम 10 वर्ष, जबकि सामान्य स्थानांतरण से पहुंचे शिक्षक अधिकतम 5 वर्ष तक रह सकेंगे। स्क्रीनिंग उत्तीर्ण शिक्षकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण तथा अध्ययन भ्रमण में भी प्राथमिकता दी जाएगी। प्रमोशन मिलने पर पहले की स्क्रीनिंग स्वतः समाप्त हो जाएगी और दोबारा स्क्रीनिंग परीक्षा देनी होगी।
पहले और अब
अब तक मॉडल संस्कृति, पीएम श्री और सीएमईईई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए एक समान और विस्तृत अलग तैनाती नीति लागू नहीं थी। विभिन्न चरणों में स्क्रीनिंग या सामान्य स्थानांतरण के माध्यम से नियुक्तियां होती थीं, लेकिन प्रक्रिया और कार्यकाल के स्पष्ट नियम तय नहीं थे।
नई शिक्षक तैनाती नीति-2026 में पहली बार मेरिट आधारित, एकीकृत और ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। अब इन स्कूलों में नियुक्ति के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा पास करना जरूरी होगा। अंतिम मेरिट 100 अंकों के आधार पर बनेगी, जिसमें शैक्षणिक रिकॉर्ड और लिखित परीक्षा दोनों को महत्व दिया जाएगा। स्क्रीनिंग का परिणाम तीन वर्ष तक मान्य रहेगा। स्क्रीनिंग से तैनात शिक्षक एक ही विद्यालय में अधिकतम 10 वर्ष और सामान्य स्थानांतरण से पहुंचे शिक्षक अधिकतम 5 वर्ष तक रह सकेंगे।
इसका सबसे बड़ा लाभ मेधावी और योग्य शिक्षकों को मिलेगा, क्योंकि चयन अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी होगा। साथ ही उत्कृष्ट विद्यालयों में बेहतर शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।















