चंडीगढ़: पीयू को टॉप यूनिवर्सिटी बनाने में पंजाब-हरियाणा करेंगे सहयोग

PU को बनाना है देश की टाॅप यूनिवर्सिटी, पंजाब-हरियाणा करेंगे सहयोग; प्रशासक ने उपराष्ट्रपति के समक्ष रखी बात
हिंदी टीवी न्यूज, चंडीगढ़। Published by: Megha Jain Updated Sat, 05 Sep 2026
चंडीगढ़ के प्रशासक ने उपराष्ट्रपति और पीयू के चांसलर सीपी राधाकृष्णन से पंजाब यूनिवर्सिटी को एक वर्ष में देश की शीर्ष यूनिवर्सिटी बनाने की अपील की है। कहा कि पंजाब और हरियाणा भी हरसंभव सहयोग देने को तैयार हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच चल रही राजनीतिक बहस के बीच शुक्रवार को पीयू के भविष्य को लेकर नई बात सामने आई। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने उपराष्ट्रपति एवं पीयू के चांसलर सीपी राधाकृष्णन से विश्वविद्यालय पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
कटारिया ने कहा कि पीयू में देश ही नहीं, दुनिया की अग्रणी यूनिवर्सिटी बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि पीयू को देश में शीर्ष संस्थान बनाने के लिए एक वर्ष का लक्ष्य तय किया जाए। इसके लिए पंजाब और हरियाणा सरकारें हरसंभव सहयोग देने को तैयार हैं।
कटारिया ने कहा कि भारत आज दुनिया के देशों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। इस दौड़ में पंजाब यूनिवर्सिटी देश के लिए बड़ी ताकत बन सकती है। विश्वविद्यालय के पास बेहतर आधारभूत ढांचा, अनुभवी शिक्षक और मजबूत शोध क्षमता है।
पेटेंट और शोध कार्य भी इसकी क्षमता को साबित करते हैं। जरूरत इन संसाधनों को सही दिशा में इस्तेमाल कर पीयू को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाने की है। उन्होंने कहा कि यदि चांसलर पीयू पर व्यक्तिगत ध्यान दें और एक वर्ष का स्पष्ट लक्ष्य तय कर काम किया जाए कि विश्वविद्यालय को दुनिया की शीर्ष संस्थाओं में कैसे पहुंचाना है, तो पंजाब और हरियाणा की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा।
डिग्री तक सीमित न रहे, हुनर और स्वरोजगार से जोड़े
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पीयू को युवाओं को हुनर, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाले पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को कौशल और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना नशे के खिलाफ लड़ाई का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है। उन्होंने उद्योगों और युवाओं के बीच कौशल के अंतर का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर उद्योगों को प्रशिक्षित कामगार नहीं मिल रहे हैं और दूसरी ओर युवा रोजगार की तलाश में हैं।
पीयू को बाजार की जरूरत के अनुरूप चार से छह महीने के छोटे अवधि के कोर्स शुरू करने चाहिए। इनमें गांवों और सामान्य पृष्ठभूमि के कम पढ़े-लिखे युवाओं को भी प्रशिक्षण मिले, ताकि वे नौकरी तलाशने के बजाय अपना काम शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकें।
कृषि शोध को किसानों की आय से जोड़ने पर जोर
कटारिया ने पीयू के शोध को पंजाब की कृषि और किसानों की आय बढ़ाने से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर शोध होना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और कृषि आधारित नए कारोबार के अवसर पैदा हों।















