एम्स बिलासपुर: पहली बार गैस्ट्रो ओपीडी, कार्डियो में नई तैनाती; 2.80 करोड़ की मशीन खरीदी

सुविधा: एम्स बिलासपुर में पहली बार गैस्ट्रो की ओपीडी, कार्डियो में एक और तैनाती, 2.80 करोड़ की मशीन खरीदी
हिंदी टीवी न्यूज, बिलासपुर। Published by: Megha Jain Updated Sat, 26 Sep 2026
अत्याधुनिक सिस्टम उपलब्ध होने के बाद पित्त की पथरी, अपेंडिक्स, हर्निया समेत कई सर्जरी में मरीजों को लेप्रोस्कोपिक तकनीक का विकल्प मिल सकेगा। इस तकनीक में बड़े चीरे के बजाय शरीर में छोटे छेद के जरिए कैमरा और सर्जिकल उपकरण पहुंचाए जाते हैं।
एम्स बिलासपुर में अब मरीजों को छोटे चीरे के जरिये होने वाली आधुनिक सर्जरी की सुविधा और मजबूत होने जा रही है। संस्थान में करीब 2.80 करोड़ रुपये का लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सिस्टम खरीदा जाएगा। अत्याधुनिक सिस्टम उपलब्ध होने के बाद पित्त की पथरी, अपेंडिक्स, हर्निया समेत कई सर्जरी में मरीजों को लेप्रोस्कोपिक तकनीक का विकल्प मिल सकेगा। इस तकनीक में बड़े चीरे के बजाय शरीर में छोटे छेद के जरिए कैमरा और सर्जिकल उपकरण पहुंचाए जाते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में कैमरा शरीर के अंदर की तस्वीर को बड़े मॉनिटर पर दिखाता है। सर्जन उसी तस्वीर को देखकर ऑपरेशन करते हैं। बड़े चीरे की तुलना में छोटे चीरे से होने वाली सर्जरी में आमतौर पर घाव छोटा रहता है।
हालांकि, किस मरीज में यह तकनीक इस्तेमाल की जाएगी, इसका निर्णय बीमारी और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ करेंगे। लेप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल पित्त की थैली में पथरी निकालने, अपेंडिक्स की सर्जरी और हर्निया के कुछ ऑपरेशन में किया जाता है। पेट से जुड़ी कई अन्य सर्जरी में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। यूरोलॉजी में भी कई तरह की सर्जिकल प्रक्रियाओं में लेप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल होता है। सिस्टम की खासियत इसका कैमरा आधारित विजुअल सिस्टम है। एम्स ने सिस्टम की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू की है। आठ अक्तूबर तक बोली जमा की जा सकती है और 9 अक्तूबर को इसे खोला जाएगा।















