करवाचौथ पर 1 घंटा 18 मिनट का खास मुहूर्त, नोट करें समय

करवाचौथ पर 1 घंटा 18 मिनट हैं बेहद खास, नोट कर लें सुहागिनें
करवाचौथ का व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, अटूट विश्वास और सुखी वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत हर सुहागिन महिला के लिए बेहद खास होता है। हालांकि अब कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को रखती हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला (बिना जल-अन्न के) उपवास रखती हैं। जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि इस बार करवाचौथ का व्रत 29 अक्तूबर, 2026 गुरुवार को होगा। इस दिन चतुर्थी तिथि का आरंभ सुबह 01:06 बजे होगा जबकि समापन रात 10:09 बजे होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से लेकर शाम 06:56 बजे तक (कुल अवधि: लगभग 1 घंटा 18 मिनट)
चंद्रोदय का समय—रात 08:17 बजे
करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व और पूजा विधि
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, करवाचौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती, विघ्नहर्ता गणेश और कार्तिकेय जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य की देवी माना जाता है, इसलिए सुहागिनें उनसे अपने सुहाग की रक्षा और घर-परिवार में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके सोलह श्रृंगार करती हैं और निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय दीवार या पटरे पर करवा चौथ माता की तस्वीर या चित्र स्थापित कर कथा सुनी जाती है। रात को आसमान में चांद के उदय होने के बाद छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखा जाता है। इसके बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर, पति के हाथों से जल ग्रहण करके महिलाएं अपने व्रत का पारण करती हैं। इसके बाद अपने रिश्तेदारों सहित सहेलियों में सरगी बांटती हैं तथा बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।














