Himachal: हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए एंटी चिट्टा टेस्ट अनिवार्य

Himachal News: हिमाचल में सरकारी नौकरी करने के लिए एंटी चिट्टा टेस्ट करवाना अनिवार्य, सीएम सुक्खू ने किया एलान
हिंदी टीवी, शिमला । Published by: Megha Jain Updated Mon, 11 May 2026
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भविष्य में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं को ‘चिट्टा टेस्ट’ से गुजरना होगा।
हिमाचल प्रदेश में बढ़ते चिट्टा कारोबार और युवाओं में नशे की बढ़ती लत को लेकर राज्य सरकार अब बड़े स्तर पर सख्त कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य में एंटी-ड्रग अभियान को नई दिशा देते हुए फैसला लिया गया है कि अब सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पहले अनिवार्य रूप से एंटी-चिट्टा टेस्ट करवाना होगा। भर्ती परीक्षा पास करने के बाद चयनित उम्मीदवारों की ड्रग स्क्रीनिंग की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।
सोमवार को राज्य सचिवालय में प्रेस वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और सरकारी संस्थानों में स्वच्छ कार्य संस्कृति सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, फार्मेसी और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की भी हर साल जांच करवाई जाएगी। सरकार इसके लिए संस्थानों के माध्यम से नियमित ड्रग स्क्रीनिंग तंत्र विकसित करने की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों की एसीआर में जुड़ेंगे एंटी-ड्रग्स प्रदर्शन मानक
राज्य सरकार अब नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल पुलिस अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहती। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में भी एंटी-ड्रग्स परफार्मेंस को शामिल किया जाएगा। यानी संबंधित जिले में चिट्टा तस्करी रोकने, जागरूकता बढ़ाने और नेटवर्क तोड़ने में अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन होगा।
सरकार का मानना है कि प्रशासनिक जवाबदेही तय किए बिना इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी कड़ी में पंचायत स्तर तक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटी जाएंगी पंचायतें
प्रदेश में चिट्टा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया जाएगा। जिन पंचायतों में नशे के मामले अधिक पाए गए हैं, वहां विशेष निगरानी और लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। पंचायत चुनावों के बाद इन क्षेत्रों में दोबारा जनजागरूकता अभियान शुरू होगा।
स्कूलों और कॉलेजों में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से शिविर लगाएंगे। इनमें उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्वयं जाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद करेंगे। सरकार इसे केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा मान रही है।
प्रतिबंधित दवाओं पर शिकंजा, कैमिस्ट और उद्योग रडार पर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण और बिक्री में शामिल उद्योगों तथा कैमिस्टों पर अब कठोर कार्रवाई होगी। लाइसेंस निरस्त करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल प्रशासन को संयुक्त जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ प्रतिबंधित दवाएं चिट्टा नेटवर्क तक पहुंच रही हैं। अब सरकार सप्लाई चेन पर ही रोक लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।
विभिन्न विभागों के करीब 90 कर्मचारी बर्खास्तगी की जद में
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि चिट्टा तस्करी या नशे से जुड़े मामलों में शामिल पाए गए विभिन्न विभागों के करीब 90 कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इनमें कुछ मामलों में विभागीय जांच पूरी हो चुकी है, जबकि कई मामलों में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। सरकार ऐसे कर्मचारियों को सेवा से हटाने की तैयारी कर रही है ताकि सरकारी तंत्र में गलत संदेश न जाए। सूत्रों के अनुसार पुलिस, शिक्षा, परिवहन और अन्य विभागों के कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं।















