चंडीगढ़: सेक्टर-39बी में अवैध निर्माण गिराने पर 27 जुलाई तक रोक

Chandigarh: सेक्टर-39 बी में अवैध निर्माण गिराने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, 27 जुलाई तक नहीं होगी कार्रवाई
हिंदी टीवी न्यूज, चंडीगढ़ । Published by: Megha Jain Updated Tue, 28 Apr 2026
याचिका कर्नल हरिंदर कौर खेत्रपाल समेत अन्य निवासियों ने दायर की है जिसमें 17 फरवरी और 20 मार्च को जारी नोटिसों को गैरकानूनी बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत नीड-बेस्ड पॉलिसी की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी।
चंडीगढ़ सेक्टर-39 बी में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में अवैध निर्माणों को गिराने की प्रशासनिक कार्रवाई पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने स्थानीय निवासियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए 27 जुलाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई से प्रशासन को रोक दिया है और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
यह याचिका कर्नल हरिंदर कौर खेत्रपाल समेत अन्य निवासियों ने दायर की है जिसमें 17 फरवरी और 20 मार्च को जारी नोटिसों को गैरकानूनी बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत नीड-बेस्ड पॉलिसी की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। ऐसे में समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही प्रशासन की ओर से नोटिस जारी करना जल्दबाजी और नियमों के विरुद्ध है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2017 से संबंधित एक अन्य मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है जिसकी सुनवाई भी 27 जुलाई को निर्धारित है। ऐसे में समान प्रकृति के मामले में एकतरफा कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।
स्थानीय निवासियों ने अदालत को बताया कि वे चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के एचआईजी श्रेणी-1 के मकानों में रह रहे हैं जहां समय-समय पर लागू नीड-बेस्ड पॉलिसी के तहत अतिरिक्त निर्माण किए गए। याचिका के अनुसार, शहर में बोर्ड की ओर से बनाए गए लगभग 70 हजार मकानों में से लगभग 95 प्रतिशत आवंटियों ने इसी तरह के निर्माण कर रखे हैं लेकिन कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों के खिलाफ की जा रही है।
याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन पर पिक एंड चूज की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि खासतौर पर उन्हीं लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जिन्होंने पहले कोर्ट का रुख किया था। नोटिसों में निवासियों को सात दिन के भीतर उल्लंघनों को हटाने और 1.30 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए थे।
प्रारंभिक सुनवाई में ही हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई थी। अब विस्तृत सुनवाई के बाद भी अदालत ने इस राहत को जारी रखते हुए साफ किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।













