शिमला: जाखू में दशहरा मनाने की क्या है पौराणिक कथा?

शिमला: जाखू में क्यों मनाया जाता है दशहरा? हनुमान जी से जुड़ी वह पौराणिक कथा, जो इस पहाड़ी को बनाती है खास
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 20 Oct 2026
शिमला का जाखू मंदिर भगवान हनुमान की भक्ति और रामायण से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। जानिए संजीवनी की तलाश में हनुमान जी की यात्रा से जुड़ी कथा और जाखू में दशहरे के धार्मिक महत्व की रोचक कहानी।
शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ियों में शुमार जाखू में दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, रामायण की कथा और भगवान हनुमान से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं का प्रतीक है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पहाड़ी पर जब श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन करने पहुंचते हैं, तो यहां की धार्मिक महत्ता और भी खास हो जाती है।
संजीवनी की तलाश में हिमालय पहुंचे थे हनुमान जी
जाखू मंदिर से जुड़ी स्थानीय पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी यात्रा के दौरान हनुमान जी इस पहाड़ी पर रुके थे। कहा जाता है कि यहां उनकी मुलाकात यक्ष ऋषि से हुई थी। इस प्रसंग के कारण जाखू को भगवान हनुमान की यात्रा से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। यह कथा ही जाखू की धार्मिक पहचान को विशेष बनाती है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पहाड़ी केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि रामायण की स्मृतियों से जुड़ा आस्था का स्थान भी है।
जाखू में दशहरे का क्या है महत्व?
पहाड़ की चोटी पर विराजमान हैं विशाल हनुमान
जाखू की कथा में आस्था और लोकविश्वास का संगम
जाखू मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। हालांकि, इन कथाओं को धार्मिक मान्यता और लोकविश्वास के रूप में समझना चाहिए; इनके हर प्रसंग की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिर भी, इन मान्यताओं ने जाखू को हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक विशेष स्थान दिलाया है। दशहरे पर जाखू की महत्ता इसी आस्था में छिपी है। यहां भगवान हनुमान की भक्ति, भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश एक साथ दिखाई देता है।
जाखू में दशहरा इसलिए खास है, क्योंकि यहां पर्व केवल रावण दहन का आयोजन नहीं, बल्कि उस भक्ति और विश्वास को याद करने का अवसर भी है, जो भगवान हनुमान को श्रीराम से जोड़ता है।














