शिमला: POCSO केस में पति-सास-ससुर बरी, पीड़िता की उम्र पर सवाल

हिमाचल: शिमला में दुष्कर्म-पॉक्सो केस में बड़ा फैसला, पति समेत सास-ससुर बरी; पीड़िता की उम्र पर उठे सवाल
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Wed, 09 Sep 2026
शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में पति, ससुर और सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष पीड़िता की घटना के समय उम्र को नाबालिग साबित करने में विफल रहा। सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पूर्व बयानों से मुकर गई और उसने जन्मतिथि 17 नवंबर 2004 बताई। बचाव पक्ष ने भी मां के पुराने शपथ पत्र पेश किए, जिनमें यही जन्मतिथि दर्ज थी।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो/दुष्कर्म) शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति, उसके पिता और मां यानी पीड़िता के ससुर और सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के सामने मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल पीड़िता की घटना के समय उम्र को लेकर था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष यह बुनियादी तथ्य साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।
अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और सामने आए विरोधाभासों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष पीड़िता को घटना के समय नाबालिग साबित करने के लिए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। नाबालिग होने का तथ्य साबित नहीं होने से पॉक्सो एक्ट के आरोपों का आधार भी कमजोर पड़ गया। इन परिस्थितियों और अभियोजन के मामले में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को देखते हुए अदालत ने पति, ससुर और सास को दोषमुक्त करार देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया।















