हिमाचल: ईंटें महंगी, घर बनाना हुआ और खर्चीला

Himachal News: घर निर्माण अब पहले से हुआ महंगा, ईंटों की कीमतों में बढ़ोतरी ने बिगाड़ा बजट
हिंदी टीवी न्यूज, ऊना। Published by: Megha Jain Updated Sat, 27 Jun 2026
कोयले की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और बेमौसमी बारिश से ईंट उद्योग पर पड़े असर ने निर्माण सामग्री के दामों में आग लगा दी है।
अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए घर निर्माण अब पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है। कोयले की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और बेमौसमी बारिश से ईंट उद्योग पर पड़े असर ने निर्माण सामग्री के दामों में आग लगा दी है। जिले में पिछले तीन माह के दौरान ईंटों के दाम प्रति हजार 2000 से 2500 रुपये तक बढ़ गए हैं। जहां पहले एक हजार ईंटें 6500 से 7000 रुपये में मिल जाती थीं, वहीं अब इनके लिए 9000 से 9500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों ने आम लोगों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सीमेंट और सरिया पहले ही महंगे चल रहे हैं, ऐसे में ईंटों की कीमतों में आई भारी वृद्धि ने घर बनाना और कठिन बना दिया है। विडंबना यह है कि ऊना जिले में बड़ी संख्या में ईंट भट्ठे संचालित होने के बावजूद स्थानीय लोगों को महंगी ईंटें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
दोगुना हुआ कोयला, बढ़ी उत्पादन लागत
ईंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कोयला पिछले कुछ समय में दोगुने से अधिक महंगा हो गया है। भट्ठा संचालकों के अनुसार अमेरिका से आयातित कोयला, जो पहले 10 से 11 हजार रुपये प्रति टन मिलता था, अब 19 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है। कोयले की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर बाजार में ईंटों के दाम पर पड़ा है। इसके साथ ही डीजल और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी ने भी लागत को और बढ़ा दिया है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुरानी दरों पर ईंटें बेचना संभव नहीं रह गया है।
बारिश ने ईंट उद्योग को गहरा नुकसान पहुंचाया
क्या कहते हैं लोग
कुछ महीने पहले ईंट खरीदना बेहतर विकल्प था, लेकिन अब दाम आसमान छू रहे हैं। सीमेंट और सरिया पहले ही महंगे हैं। एक सामान्य घर बनाने में आठ से दस लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है। सरकार को आम आदमी को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए।– सतीश कुमार, स्थानीय निवासी।
ईंट घर निर्माण की सबसे अहम सामग्री: नरोत्तम
ईंट घर निर्माण की सबसे अहम सामग्री है। अचानक बढ़े दामों ने लोगों को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है। कुछ वर्ष पहले ईंटें चार से पांच हजार रुपये प्रति हजार मिल जाती थीं, लेकिन अब घर बनाना आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।-नरोत्तम शर्मा, स्थानीय निवासी।
लाभ नहीं, केवल नुकसान ही नुकसान
सलोह में वर्षों से ईंट भट्ठा चला रहे मूल राज बताते हैं कि उद्योग कई चुनौतियों से जूझ रहा है। मजदूरों की कमी, महंगा कोयला और बेमौसमी बारिश ने कारोबार को घाटे का सौदा बना दिया है। उन्होंने कहा कि पहले केवल बरसात के मौसम में काम प्रभावित होता था, लेकिन अब कभी भी बारिश हो जाती है और तैयार हो रहा माल खराब हो जाता है। पिता की याद में भट्ठा चला रहे हैं, लेकिन लाभ नाममात्र का भी नहीं बचा है।
कोयले के दाम घटे तो सस्ती हो सकती हैं ईंटें
ईंट भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान पोहू लाल भारद्वाज ने बताया कि लगातार बढ़ती उत्पादन लागत के कारण ईंटों के दाम बढ़े हैं। उन्होंने कहा, बारिश से पिछले एक वर्ष में भारी नुकसान हुआ है। कोयला और तेल दोनों महंगे हुए हैं। ईंट निर्माण बिना कोयले के संभव नहीं है। यदि आने वाले समय में कोयले की कीमतों में कमी आती है तो ईंटों के दाम भी घट सकते हैं।
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