हिमाचल: जटिल सर्जरी से 11 साल के बच्चे का जबड़ा खोला

हिमाचल प्रदेश: मुंह तक नहीं खुल रहा था, शिमला में डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी से 11 साल के बच्चे का जबड़ा खोला
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Mon, 21 Sep 2026
शिमला के दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल में जबड़े की गंभीर समस्या से जूझ रहे 11 वर्षीय बच्चे की जटिल सर्जरी की गई। बच्चे के जबड़े की हड्डियां आपस में जुड़ गई थीं, जिससे उसका मुंह लगभग बंद था और खाने-पीने में परेशानी हो रही थी। जबड़े के विकास में कमी के कारण सांस की नली भी संकरी हो गई थी।
दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला के डॉक्टरों ने जबड़े की गंभीर समस्या से जूझ रहे 11 वर्षीय बच्चे की जटिल सर्जरी कर उसे बड़ी राहत दी है। बच्चे के जबड़े की हड्डियां आपस में जुड़ गई थीं, जिसके कारण उसका मुंह लगभग बंद हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसे खाना-पीना तक मुश्किल हो रहा था और सोते समय सांस लेने में भी परेशानी होती थी। बच्चे के जबड़े का विकास कम होने के कारण उसकी सांस की नली पर भी दबाव पड़ रहा था। इससे सांस लेने का रास्ता काफी संकरा हो गया था। ऐसे में बच्चे की सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण था।
डॉक्टरों के अनुसार बच्चे का मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था और सांस लेने का रास्ता भी काफी संकरा था। इसलिए सर्जरी के दौरान सुरक्षित रूप से सांस दिलाने की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती थी।
इस चुनौती से निपटने के लिए बच्चे की श्वासनली में छेद कर विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। इस उपचार में आईजीएमसी शिमला के निश्चेतना विभाग और कान, नाक एवं गला विभाग की टीम ने भी सहयोग दिया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए उपचार की पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ की गई। धीरे-धीरे जबड़े को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी।
बच्चे का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। ऐसे में इतनी जटिल सर्जरी और महंगे उपकरण का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था। इसे देखते हुए मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा विभाग ने बच्चे के उपचार का पूरा खर्च स्वयं उठाया।
बच्चे के जबड़े को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए विशेष उपकरण की कीमत करीब 5.5 से 6 लाख रुपये बताई गई है। इस उपकरण का खर्च भी विभाग ने वहन किया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बच्चे के खान-पान की व्यवस्था भी विभाग की ओर से की गई। सर्जरी के बाद एक्स-रे जांच में जबड़े की स्थिति में हुए बदलाव साफ दिखाई दिए। उपचार के बाद बच्चा सामान्य तरीके से सांस ले पा रहा है और पहले की तुलना में उसकी परेशानियां कम हुई हैं।
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि जटिल जबड़े और सांस से जुड़ी समस्याओं के उपचार में मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा, निश्चेतना तथा कान-नाक-गला विशेषज्ञों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।















