हिमाचल: पत्नी के नाम पर दूसरी महिला का इलाज, पति पर एफआईआर बहाल

Himachal: पत्नी के नाम पर दूसरी महिला का इलाज, आरोपी पति के खिलाफ एफआईआर बहाल
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 07 Jul 2026

हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 07 Jul 2026
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेना की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा योजना में धोखाधड़ी के आरोपी पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर और कानूनी कार्रवाई को बहाल करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने जिला अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत आरोपी को राहत दी गई थी। अब आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आपराधिक मामला दोबारा शुरू होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को 5 अगस्त को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। मामला पालमपुर क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता पत्नी और आरोपी की शादी साल 1995 में हुई थी। वैवाहिक विवाद के चलते दोनों के बीच चंडीगढ़ की फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला लंबित है। इस दौरान याचिकाकर्ता पत्नी सितंबर 2019 में अमेरिका चली गई और तब से वहीं रह रही हैं।
शिकायत के अनुसार 19 अप्रैल 2021 को पति ने एक अन्य महिला को विवेकानंद अस्पताल, पालमपुर में अपनी पत्नी के नाम पर भर्ती करवा दिया। आरोपी ने अपनी पूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना का दुरुपयोग करते हुए सरकार को लाखों रुपये के मेडिकल बिल भेजे और इस तरह सरकार व अपनी पत्नी के साथ धोखाधड़ी की। शिकायतकर्ता ने अमेरिका में होने के कारण अपनी बहन को जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी। बहन ने जब पुलिस महानिदेशक और स्थानीय पुलिस से शिकायत की, तो पुलिस ने इसे आपसी वैवाहिक विवाद बताकर एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट अदालत का रुख किया, जहां अगस्त 2024 में पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आरोपी ने पालमपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के पास अपील की थी। मई 2025 में सत्र न्यायालय ने तकनीकी आधारों पर एफआईआर और पूरी कार्रवाई को ही रद्द कर दिया था। इसी फैसले को पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता विनय शर्मा को शिमला की अदालत से बड़ी राहत मिली है। सीबीआई कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने अधिवक्ता की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। विनय पर छोटा शिमला थाना में 5 जून 2026 को भारतीय नागरिक संहिता की धाराओं 248, 351 और 356 (2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ है। इसमें आरोप लगाया है कि अधिवक्ता ने उनके खिलाफ झूठी, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक टिप्पणियां की हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्राथमिकी में उल्लेखित धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी के तत्व प्रथम दृष्टया स्पष्ट नहीं हो रहे हैं। अदालत ने आदेश में कहा कि अधिवक्ता की ओर से पुलिस को दी शिकायत को झूठी जानकारी देने के मामले में पुलिस के पास स्वयं धारा 217 बीएनएस के तहत कार्रवाई करने का विकल्प था, जिसे नहीं अपनाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
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