हिमाचल: खाद संकट, खाली गोदामों से फसलों की बिजाई पर असर

हिमाचल में खाद का संकट: अधिकतर गोदाम खाली या मांग के मुकाबले बेहद कम खाद, फसलों की बिजाई होगी प्रभावित
हिंदी टीवी न्यूज, ऊना। Published by: Megha Jain Updated Wed, 03 Jun 2026
खरीफ सीजन से पहले हिमाचल प्रदेश में रासायनिक खाद की कमी किसानों और बागवानों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। प्रदेश के कई सहकारी और खाद वितरण केंद्रों में स्टॉक खत्म हो चुका है, जबकि अन्य स्थानों पर मांग के मुकाबले बेहद कम खाद उपलब्ध है।
हिमाचल में खरीफ सीजन से पहले किसानों और बागवानों के सामने खाद का संकट गहराता नजर आ रहा है। प्रदेश के अधिकांश सहकारी और खाद वितरण केंद्रों में रासायनिक खाद की उपलब्धता बेहद सीमित हो गई है, जबकि कई गोदाम पूरी तरह खाली पड़े हैं। ऐसे में जल्द ही प्रदेश में होने वाली मक्की की बिजाई और अन्य खरीफ फसलों की तैयारियों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान इन दिनों 12-32-16 सहित अन्य बोरी वाली खाद के लिए गोदामों के चक्कर काटने को मजबूर हैं लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। किसान रोहित कुमार, सन्नी, जसविंदर सिंह, रामपाल सैनी, रशपाल सहित अन्य का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से वे खाद के लिए लगातार गोदामों का रुख कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
कई स्थानों पर मांग के मुकाबले बेहद कम मात्रा में खाद उपलब्ध होने से वितरण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इफको हिमाचल प्रदेश के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. सुधीर सिंह कटियार ने बताया कि खाड़ी देशों में चले युद्ध के कारण खाद तैयार करने के लिए कच्चे माल की सप्लाई बाधित हो रही है। खाद की नई खेप की डिमांड भेजी गई है। उपलब्धता के अनुसार ही वितरण किया जाएगा। किसान विकल्प के तौर पर नैनो खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्यों पैदा हो रहा खाद संकट
देश में इस समय खाद संकट के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। भारत डीएपी और जटिल उर्वरकों, जैसे 12-32-16 के लिए आवश्यक फॉस्फोरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट और पोटाश का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने पर देश में उत्पादन और उपलब्धता दोनों प्रभावित हुई है। पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तनाव, शिपिंग लागत में वृद्धि और कई देशों द्वारा निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने से उर्वरकों की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा।















