Punjab: वारिस पंजाब दे से शिअद बादल की चुनौती बढ़ी

पंजाब की राजनीति में नया मोड़: वारिस पंजाब दे से बढ़ी शिअद बादल की चुनौती, पंथक वोट बैंक में आएगा बिखराव
हिंदी टीवी न्यूज, जालंधर। Published by: Megha Jain Updated Fri, 31 Jul 2026
पंथक राजनीति हमेशा सिख धार्मिक पहचान, बंदी सिखों की रिहाई, बेअदबी के मामलों, श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द रही है। लंबे समय तक शिअद बादल इसका सबसे बड़ा प्रतिनिधि रहा लेकिन पिछले एक दशक में उसकी पंथक विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठे हैं।
पंजाब की राजनीति में पंथक मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। लंबे समय तक सिख राजनीति की सबसे प्रभावशाली ताकत रहे शिरोमणि अकाली दल (बादल) के सामने अब चुनौती केवल आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा से नहीं बल्कि उभर रहे अकाली दल वारिस पंजाब दे से भी है। हाल के घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंथक राजनीति का केंद्र तेजी से बदल रहा है।















