Himachal: दवा कंपनी पर पर्यावरण उल्लंघन, NGT का नोटिस

NGT Notice: हिमाचल की दवा कंपनी पर पर्यावरण उल्लंघन के आरोप, एनजीटी ने जारी किया नोटिस
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 04 Aug 2026
एनजीटी ने सोलन के नालागढ़ स्थित किइनवान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों पर नोटिस जारी किया है। कंपनी पर अपशिष्ट जल और रासायनिक कचरा खड्ड में छोड़ने, भूजल के अधिक दोहन और पर्यावरणीय स्वीकृति के दौरान गलत जानकारी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ तहसील स्थित पलासरा गांव में संचालित एक औषधि निर्माण इकाई किइनवान प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले में नोटिस जारी किया है। यह मामला पर्यावरणीय मानकों के पालन, जल स्रोतों की सुरक्षा और औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि यह प्रकरण पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। इसके बाद अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए आवेदकों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले नोटिस की तामील का शपथपत्र दाखिल करें।
यह आदेश 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने मूल आवेदन संख्या 446/2026 (धर्मिंदर सिंह एवं अन्य बनाम किइनवान प्रा. लि. एवं अन्य) में पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने जिला प्रशासन को शिकायत की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
मामला नदियों और अन्य जल स्रोतों के निकट खनन निरीक्षण चौकी, वज़न पुल (वेब्रिज) के कथित अवैध निर्माण और मलबा डंप किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि इन गतिविधियों से पर्यावरण और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थल पर जांच आवश्यक है। इसके बाद अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त, सिरमौर को निर्देश दिए कि वे आवेदक की शिकायत पर विचार करें और संबंधित स्थान का निरीक्षण कर तथ्यों की जांच कराएं।
अधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा दो माह के भीतर उचित सुधारात्मक (Remedial) और दंडात्मक (Punitive) कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन भी कराया जाए।
एनजीटी के इस निर्देश को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।















