Chandigarh: पलवल दुष्कर्म-हत्या दोषी की फांसी 50 साल की कैद में बदली

Highcourt: सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी की फांसी 50 साल की वास्तविक कैद में बदली, पलवल का मामला
हिंदी टीवी न्यूज,चंडीगढ़। Published by: Megha Jain Updated Thu, 09 Jul 2026
अदालत ने दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने के अपराध में उसकी दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा। साथ ही पुलिस जांच में दस्तावेज गढ़ने, लोक अभियोजक की गंभीर लापरवाही और ट्रायल कोर्ट की विफलताओं पर कड़ी टिप्पणी की।
सात साल की उम्र पूरी होने से महज 17 दिन पहले दुष्कर्म और हत्या की शिकार हुई मासूम बच्ची के दोषी की सजा-ए-मौत को हाईकोर्ट ने बिना किसी छूट के 50 वर्ष की वास्तविक कैद में बदल दिया है।
अदालत ने दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने के अपराध में उसकी दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा। साथ ही पुलिस जांच में दस्तावेज गढ़ने, लोक अभियोजक की गंभीर लापरवाही और ट्रायल कोर्ट की विफलताओं पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने ट्रायल कोर्ट की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हर मुकदमा एक जहाज की तरह है जिसे किनारे तक पहुंचना है और जब वह मुश्किल पानी में हो तो ट्रायल जज जहाज छोड़ने वाला अंतिम व्यक्ति होना चाहिए।
खंडपीठ ने पीड़िता के कपड़ों की पहचान न कराए जाने को लोक अभियोजक और ट्रायल कोर्ट की बड़ी चूक बताया। अदालत ने कहा कि यह जांच एजेंसी की नहीं बल्कि अभियोजन और दोनों ट्रायल जजों की विफलता थी।
अदालत ने कहा कि न्यायाधीश का मूल कर्तव्य न्याय सुनिश्चित करना है ताकि कोई निर्दोष दंडित न हो और कोई दोषी बच न सके। अदालत ने दोषसिद्धि बरकरार रखी और फांसी की सजा को बिना छूट 50 वर्ष के वास्तविक आजीवन कारावास में बदल दिया। साथ ही हत्या के मामले में 50 लाख और पॉक्सो मामले में 23 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया, जिसकी वसूली होने पर राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।















