Himachal: मंत्री की सिफारिश पर नियुक्ति रद्द, वेतन वसूली के आदेश

हिमाचल: मंत्री की सिफारिश पर हुई आशा वर्कर की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने दिए वेतन वसूली के आदेश
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Thu, 30 Apr 2026
प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले की पधर तहसील में एक आशा वर्कर की नियुक्ति को रद्द करते हुए सरकारी तंत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप पर फटकार लगाई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले की पधर तहसील में एक आशा वर्कर की नियुक्ति को रद्द करते हुए सरकारी तंत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप पर फटकार लगाई है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने न केवल नियुक्ति को अवैध घोषित किया, बल्कि चयनित उम्मीदवार की ओर से अब तक लिए गए वेतन को भी सरकारी खजाने में वापस जमा करने (रिकवरी) का आदेश दिया है। अदालत ने प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मेरिट सूची में अगले योग्य उम्मीदवार (याचिकाकर्ता) को नियुक्ति पत्र जारी करें। अदालत ने पाया कि तत्कालीन स्वास्थ्य एवं कानून मंत्री के कार्यालय से एक नोट जारी किया गया था, इसमें प्रतिवादी चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही गई थी।
चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड से पता चला कि वस्तुनिष्ठ मापदंडों में याचिकाकर्ता को 2 अंकों की बढ़त हासिल थी। हालांकि इस बढ़त को खत्म करने के लिए साक्षात्कार समिति के सरकारी सदस्यों (बीएमओ और बीडीओ)ने नियुक्त उम्मीदवार को असामान्य रूप से अधिक अंक दिए और याचिकाकर्ता को जानबूझकर बहुत कम अंक दिए है।अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक नियुक्तियों में केवल और केवल मेरिट ही एकमात्र मानदंड होना चाहिए।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मंत्री की इच्छा अधिकारियों के लिए एक आदेश बन गई थी।चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और इसे केवल मंत्री को खुश करने और राजनीतिक प्रभाव के तहत अंजाम दिया गया था।अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता के पास योग्यता के आधार पर अधिक अंक थे, लेकिन अधिकारियों ने मंत्री के दबाव में साक्षात्कार के अंकों का खेल खेलकर मेरिट सूची को बदल दिया। यह पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और मनमाना था।















