हिमाचल: चश्मे-बावड़ियां बचाएंगी पहाड़ों की प्यास
हिमाचल प्रदेश: चश्मे-बावड़ियां बचाएंगे पहाड़ों की प्यास, पूरे जलग्रहण क्षेत्र का होगा वैज्ञानिक संरक्षण
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Mon, 07 Sep 2026
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक जलस्रोतों को मजबूत करने के लिए स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत केवल चश्मों के आसपास निर्माण करने के बजाय पूरे जलग्रहण और रिचार्ज क्षेत्र का संरक्षण होगा। जीआईएस मैपिंग, हाइड्रो-जियोलॉजिकल अध्ययन, कंटूर ट्रेंच और चेक डैम जैसे उपायों के साथ पंचायतों और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में पारंपरिक प्राकृतिक जलस्रोतों जैसे चश्मों, बावड़ियों और नौण को वैज्ञानिक तरीके से मजबूत किया जाएगा। मानसून में बादल फटने, भूस्खलन और भारी बारिश से पेयजल योजनाओं को बार-बार नुकसान पहुंचता है। पाइपलाइन टूटने तथा जलस्रोतों में गाद भरने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखना राज्य की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
जलस्रोतों की निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं और कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। पैरा-हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के तौर पर प्रशिक्षित स्थानीय लोग जलस्रोतों के प्रवाह और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी कर सकेंगे। पानी के डिस्चार्ज में लगातार कमी आने पर समय रहते संरक्षण के उपाय शुरू किए जा सकेंगे। जलस्रोतों की सुरक्षा को केवल विभागीय जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। ग्राम पंचायतों, जल समितियों, महिला मंडलों और स्थानीय जल उपयोगकर्ता समूहों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना, कचरा और गंदा पानी पहुंचने से रोकना तथा संरक्षण कार्यों की निगरानी स्थानीय स्तर पर की जा सकेगी।
हिमाचल के पारंपरिक जलस्रोत हमारी जल सुरक्षा की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन्हें वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करते हुए पंचायतों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से लंबे समय तक सुरक्षित रखने पर सरकार का जोर रहेगा। – मुकेश अग्निहोत्री, उपमुख्यमंत्री















