हिमाचल: बिजली उपभोक्ता आयोग को बता सकेंगे अपनी समस्याएं

हिमाचल: बिजली कटौती से बिलिंग तक, उपभोक्ता नियामक आयोग को बता सकेंगे परेशानी
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 20 Oct 2026
प्रदेश में बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ता हों या बिल में गड़बड़ी और शिकायतों के समाधान में देरी से जूझ रहे लोग अब अपनी समस्याएं सीधे विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश में बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ता हों या बिल में गड़बड़ी और शिकायतों के समाधान में देरी से जूझ रहे लोग अब अपनी समस्याएं सीधे विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा सकेंगे। आयोग ने बिजली सेवाओं की गुणवत्ता, आपूर्ति की निरंतरता और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं से फीडबैक मांगा है। इसके माध्यम से आयोग यह जानने का प्रयास करेगा कि बिजली बोर्ड उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं दे रहा है या नहीं। तय मानकों पर खरा नहीं उतरने पर उपभोक्ताओं को बोर्ड की ओर से मुआवजा भी मिलेगा। फीडबैक प्रपत्र और इसे भेजने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट: www.hperc.org पर प्राप्त की जा सकती है।
निर्धारित सेवा मानकों का पालन करना अनिवार्य
बिजली वितरण कंपनी के लिए आयोग की ओर से निर्धारित सेवा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इन मानकों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, सेवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की शिकायतों का तय समय में निपटारा करना शामिल है। यदि बिजली बोर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाएं देने में विफल रहता है, तो लागू नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार उपभोक्ता मुआवजे के हकदार हो सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से मिलने वाला फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आयोग को सेवाओं में कमियों की पहचान करने और बिजली बोर्ड की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।
केवल फीडबैक देने से मुआवजा मिलना सुनिश्चित नहीं होगा
हालांकि, केवल फीडबैक देने से मुआवजा मिलना सुनिश्चित नहीं होगा। इसके लिए संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। फीडबैक के माध्यम से उपभोक्ता अपने क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति, कटौती की बारंबारता और आपूर्ति बहाल होने में लगने वाले समय के बारे में जानकारी दे सकेंगे। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में बिजली सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। बिजली बिलों में गलत राशि दर्ज होने, बिलिंग की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने और बिल संबंधी शिकायतों के समाधान में देरी जैसे मुद्दे भी उठाए जा सकेंगे। उपभोक्ता बिजली दरों से जुड़ी जानकारी को समझने में आने वाली परेशानियों के बारे में भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।















