हिमाचल विधानसभा: संस्थान बंद करने पर सुक्खू-जयराम आमने-सामने

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: संस्थान बंद करने के मुद्दे पर सदन में संग्राम, सुक्खू-जयराम आमने-सामने
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 01 Sep 2026
हिमाचल विधानसभा में मंगलवार को संस्थानों को बंद, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर प्रश्नकाल की शुरुआत में ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। करीब आधे घंटे तक मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा ने बंद संस्थानों का ब्योरा मांगा, जबकि सुक्खू ने जरूरत के आधार पर संस्थान खोलने और पिछली सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल की शुरुआत ही तीखी बहस के साथ हुई। संस्थानों को बंद, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच करीब आधे घंटे तक नोकझोंक होती रही। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार आमने-सामने हुए। भाजपा विधायकों ने सरकार से पिछले तीन वर्षों में बंद किए गए और नए खोले गए संस्थानों का विस्तृत ब्योरा मांगा।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करेगी। जहां संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां उन्हें खोला जाएगा और आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत आधारित संस्थान खोलने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने की घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जिन संस्थानों को बदले की भावना से बंद किया गया, क्या उन्हें दोबारा खोला गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर कांग्रेस सरकार के पिछले पांच वर्षों में लिए गए फैसलों की समीक्षा करेगी। जयराम ने यह भी कहा कि जनगणना पूरी होने तक संस्थानों को लेकर घोषणाएं नहीं की जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि संस्थान बंद करने के फैसले नीतिगत होते हैं, व्यक्तिगत नहीं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड को बंद किया गया था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि संस्थान खोलने से पहले भाजपा सरकार को पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान खोलना राज्य का विषय है और सरकार की घोषणाएं नियमों के अनुसार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना पूरी होने के बाद आवश्यकता के अनुसार संस्थानों को अधिसूचित किया जाएगा।














