हिमाचल हाईकोर्ट: जालसाजी गंभीर अपराध, एफआईआर रद्द नहीं होगी

हिमाचल हाईकोर्ट: दस्तावेजों की जालसाजी समाज के खिलाफ अपराध, एफआईआर रद्द नहीं हो सकती
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Fri, 21 Aug 2026
अदालत ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट और प्रदूषण बोर्ड जैसी संस्थाएं जनता की सुरक्षा से जुड़ी हैं। अगर इनके जाली सर्टिफिकेट बनाने के मामलों को आपसी समझौते से निपटाया जाने लगा, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे। लोग पहले फर्जीवाड़ा करेंगे और पकड़े जाने पर शिकायतकर्ता को पैसे देकर केस रफा-दफा कर लेंगे।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी या नियामक विभागों के दस्तावेजों में जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे संगीन आपराधिक मामलों को केवल शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट और प्रदूषण बोर्ड जैसी संस्थाएं जनता की सुरक्षा से जुड़ी हैं। अगर इनके जाली सर्टिफिकेट बनाने के मामलों को आपसी समझौते से निपटाया जाने लगा, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे। लोग पहले फर्जीवाड़ा करेंगे और पकड़े जाने पर शिकायतकर्ता को पैसे देकर केस रफा-दफा कर लेंगे। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने सोलन जिला के बद्दी थाना में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी की एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता भुवन कुमार एक कंसलटेंट के रूप में काम करता था। उसने शिकायतकर्ता की मुलाकात आकाश कुमार नाम के व्यक्ति से कराई, ताकि वह सब्सिडी का लाभ लेने के लिए फायर डिपार्टमेंट (अग्निशमन विभाग) और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) से अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलवा सके। इस काम के लिए दो लाख लिए गए, जो भुवन कुमार के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए। जांच में यह भी सामने आया कि जो एनओसी दी गई, वह पूरी तरह फर्जी और जाली थी। इसके बाद 25 फरवरी 2022 को पुलिस थाना मानपुरा (बद्दी)में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी और शिकायतकर्ता ने आपस में समझौता कर लिया। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि पैसे वापस मिलने के बाद वो केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।















