एम्स बिलासपुर में अत्याधुनिक जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम स्थापित होगा

AIIMS Bilaspur: एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में लगेगा अत्याधुनिक जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम, इसमें मिलेगी मदद
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Megha Jain Updated Thu, 01 Jan 2026
एम्स बिलासपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस प्रणाली के जरिये कैंसर, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के साथ विभिन्न जेनेटिक विकारों की पहचान शुरुआती चरण में करना संभव होगा।
एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में अहम पहल की जा रही है। संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस हाईटेक सिस्टम के स्थापित होने से गंभीर, जटिल और लंबे समय तक इलाज वाली बीमारियों की जांच में अभूतपूर्व सटीकता आएगी। इस प्रणाली के जरिये कैंसर, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के साथ विभिन्न जेनेटिक विकारों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और भरोसेमंद हो जाएगी। इससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ना संभव होगा, जिससे इलाज की सफलता दर भी बढ़ेगी।
यह सिस्टम केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एम्स में मेडिकल रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों को भी मजबूती देगा। डॉक्टर और शोधकर्ता इस तकनीक की मदद से नई बीमारियों, उनके प्रसार और नवीन उपचार पद्धतियों पर गहन अध्ययन कर सकेंगे। इससे भविष्य में मरीजों के लिए अधिक प्रभावी उपचार विकल्प सामने आ सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक रोग की पहचान को केवल अनुमान तक सीमित न रखकर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सुनिश्चित करेगी। जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम एक अत्याधुनिक डिजिटल इमेजिंग प्रणाली है, जो जैविक नमूनों की बहुत ही स्पष्ट तस्वीरें तैयार करती है। जब मरीज के खून, थूक या अन्य सैंपल की जांच की जाती है, तो उसमें मौजूद वायरस, बैक्टीरिया या आनुवांशिक बदलाव नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते। यह मशीन उन नमूनों को डीएनए और प्रोटीन स्तर पर पकड़कर उनका विश्लेषण करती है।
जल्द मिलेगी रिपोर्ट, तुरंत शुरू होगा उपचार
जेल डॉक्युमेंटेशन सिस्टम उन्नत सॉफ्टवेयर से लैस है, जो जांच प्रक्रिया को तेज करता है। इससे नमूनों के विश्लेषण में कम समय लगेगा और मरीजों को जांच रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त होगी। समय पर रिपोर्ट मिलने से डॉक्टर तुरंत उपचार शुरू कर सकेंगे, जिससे मरीजों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की राहत मिलेगी।















