हिमाचल: रोजगार और शिक्षा के लिए गांव छोड़ रहे लोग, जड़ों से जुड़ाव कायम

हिमाचल के गांवों से पलायन की तस्वीर: रोजगार-शिक्षा के लिए गांव छोड़ रहे हिमाचली, फिर भी जड़ों से जुड़ाव कायम
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Mon, 19 Oct 2026
हिमाचल प्रदेश के नौ गांवों के 486 परिवारों पर किए गए अध्ययन में रोजगार और शिक्षा की कमी को पलायन के प्रमुख कारणों में शामिल पाया गया। अध्ययन में शामिल अधिकतर लोग नियमित रूप से गांव लौटते रहे। बाहर रहकर कमाई करने वाले कई लोगों ने परिवारों को पैसे भेजे, जिनका इस्तेमाल घरेलू खर्च, कृषि और शिक्षा पर हुआ।
बेहतर रोजगार और शिक्षा की तलाश में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांवों से लोग बाहर जरूर जा रहे हैं, लेकिन अपनी जड़ों से उनका जुड़ाव बरकरार है। राज्य के नौ जिलों के नौ गांवों में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों का पलायन मुख्य रूप से अस्थायी प्रकृति का था। वे समय-समय पर अपने गांव लौटते रहे और परिवारों से जुड़े रहे। यह शोधपत्र हाल ही में फ्रंटियर्स इन ह्यूमन डायनेमिक्स शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन मंडी जिले के धनरासी, चंबा के भरमाला, सिरमौर के बटोल, सोलन के कियारटू, कांगड़ा के राख, कुल्लू के मेहा, शिमला के फिरनू, किन्नौर के सार्यो और लाहौल-स्पीति के करदांग गांवों में किया गया।
शोध में विभिन्न संस्थानों से जुड़े शोधकर्ताओं ने नौ गांवों के 486 परिवारों के कुल 1,894 लोगों से जुटाई गई जानकारी का विश्लेषण किया। अध्ययन में दर्ज 440 लोगों के जवाबों के अनुसार, 40.68 प्रतिशत ने रोजगार के अवसरों की कमी और 38.64 प्रतिशत ने शिक्षा को पलायन का प्रमुख कारण बताया।
शोध में शिक्षा और पलायन के बीच भी उल्लेखनीय संबंध सामने आया। अध्ययन के अनुसार, उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों में पलायन की संभावना कम पढ़े-लिखे लोगों की तुलना में 9.96 गुना दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि बेहतर रोजगार और शिक्षा की तलाश लोगों को गांवों से बाहर जाने के लिए प्रेरित करती है। इससे संकेत मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता बेहतर करने से पलायन के स्वरूप पर असर पड़ सकता है।
समाजशास्त्री डॉ. मोहन झारटा के अनुसार, आम कहावत है कि पहाड़ की जवानी और पानी बाहर के लोगों के काम आते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश की स्थिति उत्तराखंड से अलग है। उन्होंने कहा कि अध्ययन भी इसी ओर ध्यान खींचता है। उनके अनुसार, राज्य में स्वरोजगार के कई साधन उपलब्ध हैं। निचले क्षेत्रों में कृषि और ऊपरी इलाकों में बागवानी आजीविका के वैकल्पिक साधन हैं। इसलिए उनके विचार में हिमाचल में पलायन अस्थायी प्रकृति का है और लोग बाहर रहने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।















