हिमाचल हाईकोर्ट: पुराने OBC प्रमाणपत्र पर उम्मीदवारी रद्द करना गलत

Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- ओबीसी प्रमाणपत्र पुराना होने पर उम्मीदवारी रद्द करना गलत
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Sat, 30 May 2026
कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में चयन समिति का यह कर्तव्य है कि वह उम्मीदवार को नया प्रमाणपत्र पेश करने के लिए उचित समय दे।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि काउंसलिंग के समय किसी उम्मीदवार का अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र पुराना या अमान्य पाया जाता है, तो उसकी उम्मीदवारी को सीधे खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में चयन समिति का यह कर्तव्य है कि वह उम्मीदवार को नया प्रमाणपत्र पेश करने के लिए उचित समय दे। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने विभाग की कार्रवाई को कानूनन गलत ठहराते हुए निर्देश दिए है कि याचिकाकर्ता को वेटरनेरी फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति दी जाए।
उन्हें यह नियुक्ति उसी तारीख से दी जाएगी, जब उनसे कम अंक वाले उम्मीदवार को चुना गया था। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से नियुक्त कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया जाएगा। याचिकाकर्ता को केवल नोशनल (सांकेतिक) तौर पर वरिष्ठता का लाभ मिलेगा और वास्तविक वित्तीय लाभ फैसले की तारीख के बाद से लागू होंगे। अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति या ओबीसी का दर्जा किसी व्यक्ति को जन्म से मिलता है। यह कोई ऐसी योग्यता नहीं है जो समय के साथ बदलती या घटती-बढ़ती रहे। यदि काउंसलिंग कमेटी को प्रमाण पत्र की वैधता पर कोई संदेह था, तो विवेक का तकाजा यह था कि याचिकाकर्ता को नया प्रमाण पत्र लाने के लिए कुछ समय दिया जाता।
उल्लेखनीय है कि पशुपालन विभाग ने अनुबंध के आधार पर ग्राम पंचायत वेटनरी असिस्टेंट से वेटनरी फार्मासिस्ट के पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें ओबीसी ओपन श्रेणी के लिए 27 पद आरक्षित थे। याचिकाकर्ता जो इसी श्रेणी से संबंध रखती है को भी काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था।अंतिम मेरिट सूची में प्राथी के 64 अंक थे, जबकि उनके वर्ग में 63.75 अंक पाने वाली एक अन्य महिला का चयन कर लिया गया, लेकिन याचिकाकर्ता का नाम सूची से गायब था।पशुपालन विभाग ने अदालत में तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की योग्यता पर कोई विवाद नहीं है। हालांकि, काउंसलिंग के समय उन्होंने जो दो ओबीसी प्रमाण पत्र (एक मायके पक्ष और एक ससुराल पक्ष का) पेश किए थे, वे सरकारी नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक पुराने होने के कारण अमान्य थे। इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।














