हाईकोर्ट: मुआवजे के लिए आश्रित होना जरूरी नहीं

मुआवजे के लिए आश्रित होना अनिवार्य नहीं: हाईकोर्ट ने पलटा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल जींद का फैसला
हिंदी टीवी न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ । Published by: Megha Jain Updated Tue, 14 Jul 2026
सर्वोच्च अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि मोटर वाहन कानून के तहत मृतक के कानूनी वारिस मुआवजे की याचिका दायर कर सकते हैं। इसके लिए आर्थिक रूप से आश्रित होना जरूरी नहीं है।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सड़क दुर्घटना में माता-पिता की मौत होने पर शादीशुदा और कमाने वाले बेटा-बेटी भी मुआवजे के हकदार हैं। मुआवजे के लिए आश्रित होना अनिवार्य नहीं है।
जींद ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना को लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई माना था। हालांकि, उसने यह कहते हुए मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था कि दावेदार शादीशुदा हैं और मृतक पर निर्भर नहीं थे। इसके खिलाफ राम प्रसाद और उनकी बहन ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की। जस्टिस विकास बहल ने ट्रिब्यूनल के इस दृष्टिकोण को कानून के विपरीत बताया।
सर्वोच्च अदालत का हवाला
हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि मोटर वाहन कानून के तहत मृतक के कानूनी वारिस मुआवजे की याचिका दायर कर सकते हैं। इसके लिए आर्थिक रूप से आश्रित होना जरूरी नहीं है। शादीशुदा और कमाने वाले बेटे-बेटी भी कानूनी वारिस होने के कारण मुआवजे के पात्र हैं। मृतक बलवान नियमित आयकरदाता थे और दुर्घटना से पहले उनकी वार्षिक आय 3,15,680 रुपये थी। हाई कोर्ट ने इसी आय को आधार बनाकर मुआवजे की गणना की।















