उत्तराखंड: क्लर्क-कर कर्मी बने निकायों के अधिशासी अधिकारी

Uttarakhand: क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मचारियों को बना दिया निकायों में अधिशासी अधिकारी, आदेशों से मची हलचल
हिंदी टीवी न्यूज, देहरादून। Published by: Megha Jain, Updated Thu, 23 Jul 2026
उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों की तैनाती को लेकर शहरी विकास निदेशालय के हालिया आदेशों ने प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विभाग ने नियमित ईओ की कमी को पूरा करने के लिए क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक और अकाउंट कर्मचारियों सहित विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी है।
शहरी विकास निदेशालय ने नगर निकायों में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी (ईओ) बना दिया। खास बात ये है कि विभाग के पास 60 ईओ हैं, जिनमें से कई को नगर निगमों में भेज दिया गया है। उनकी जगह खाली हुए पदों पर ये तैनाती बतौर प्रभारी ईओ की गई हैं।
जो पूरे कॅरिअर में नहीं बन सकते, उन्हें सीधे बना दिया ईओ
सफाई निरीक्षक अपने कॅरिअर की सभी पदोन्नति लेने के बाद भी कभी अधिशासी अधिकारी नहीं बन सकते। दूसरी बार, शहरी निकायों में ईओ की भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है। लिहाजा, सवाल उठ रहे हैं कि शहरी विकास विभाग ने नियमों का दरकिनार कर सफाई निरीक्षकों को ये जिम्मेदारी सौंप दी। उत्तर प्रदेश के 2017 के आदेश के अनुसार ईओ का प्रभार केवल एसडीएम स्तर के अधिकारी को ही दिया जा सकता है। उत्तराखंड में भी इसका अनुपालन होता रहा है। उत्तराखंड स्थानीय निकाय(केंद्रीकृत) सेवा नियमावली 2019 के तहत ईओ पद पर नियुक्ति पदोन्नति(सात-आठ वर्ष की सेवा या वरिष्ठता) या आयोग के माध्यम से होनी चाहिए।
हाईकोर्ट भी दे चुका आदेश
दो मई 2025 को नैनीताल हाईकोर्ट ने निकायों में कर्मचारियों की कमी, प्रभारी व्यवस्था पर अहम फैसला सुनाया था। न्यायालय ने सचिव शहरी विकास को याचिकाकर्ता अनु पंत की याचिका पर चार माह के भीतर निर्णय का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के अधिकांश निकायों में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी, कर संग्राहक, सफाई निरीक्षक और सहायक लेखाकार जैसे जिम्मेदार पदों का प्रभार सौंपा गया है। इस व्यवस्था से निकायों का कामकाज और आम जनता को मिलने वाली बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। राज्य सरकार के पक्ष और सभी पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए हाईकोर्ट ने सचिव शहरी विकास को इस संबंध में आदेश दिया था।
ये व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है। जो पूर्व में प्रभारी ईओ रहे हैं, उन्हीं को ईओ बनाया गया है। हमारे पास ईओ के पद रिक्त हैं। इस कारण ये तैनातियां की गई हैं। -राम सिंह कैड़ा, शहरी विकास मंत्री















