हिमाचल: मेडिकल भांग की खेती सस्ती होगी, घटेगी लाइसेंस फीस

Himachal News: मेडिकल भांग की खेती होगी सस्ती, सरकार घटाएगी लाइसेंस फीस; किसानों को मिलेगी राहत
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Mon, 17 Aug 2026
हिमाचल प्रदेश में मेडिकल उपयोग के लिए नियंत्रित भांग की खेती और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंस शुल्क घटाने की तैयारी है। मौजूदा प्रस्ताव में खेती के लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए दो करोड़ रुपये सालाना शुल्क रखा गया है। सरकार को सुझाव मिले हैं कि इतनी ऊंची दरों से किसान और निवेशक पीछे हट सकते हैं। अब आबकारी एवं कर विभाग शुल्क संरचना की समीक्षा कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश में मेडिकल उपयोग के लिए भांग की खेती और उससे जुड़े उद्योगों का रास्ता आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार मेडिकल भांग की नियंत्रित खेती के लिए प्रस्तावित लाइसेंस शुल्क में राहत देने जा रही है। खेती के लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए दो करोड़ रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क तय किए जाने के बाद सरकार को विभिन्न स्तरों से सुझाव मिले हैं कि इतनी ऊंची दरें किसानों और निवेशकों को हतोत्साहित कर सकती हैं।
भांग आधारित दवाओं, अर्क और अन्य अनुमोदित उत्पादों के निर्माण के लिए मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जिसके लिए दो करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क प्रस्तावित है।
सरकार अब इन दरों को कम कर परियोजना को अधिक व्यवहारिक और निवेश अनुकूल बनाने पर विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम शुल्क संरचना तय करते समय किसानों, उद्योग जगत और विशेषज्ञों की राय को भी ध्यान में रखा जाएगा।















