हिमाचल हाईकोर्ट: अधिसूचना से 17 साल पहले बिना मुआवजे भूमि कब्जाना गैरकानूनी

हिमाचल हाईकोर्ट: अधिसूचना जारी होने से 17 साल पहले ही बिना मुआवजा दिए भूमि का कब्जा लेना गैरकानूनी
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Fri, 25 Sep 2026

हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Fri, 25 Sep 2026
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के एक मामले में स्पष्ट किया है कि किसी नागरिक की जमीन पर बिना कानूनी प्रक्रिया और मुआवजा दिए वर्षों तक कब्जा जमाना पूरी तरह गलत है। हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे से जुड़ी अपील पर निर्णय सुनाते हुए माना है कि अधिसूचना जारी होने से 17 साल पहले ही बिना मुआवजा दिए भूमि का कब्जा ले लेना गैरकानूनी था। न्यायाधीश रोमेश वर्मा की अदालत ने अपीलकर्ता जमीन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को वर्ष 1990 से 2007 तक का हर्जाना और ब्याज की दर में संशोधन के आदेश दिए हैं। दरअसल लोक निर्माण विभाग ने शिमला जिले के ठियोग में कारगोली-नाला-मुंडू लिंक सड़क के निर्माण के लिए मंगत राम की जमीन का कब्जा वर्ष 1990 में ही ले लिया था, पर पैसे नहीं दिए और उस पर गाड़ियां चलने लगी थीं।
मुआवजा नहीं मिलने पर जमीन मालिक ने 2006 में हाईकोर्ट का रुख किया
वर्षों तक मुआवजा नहीं मिलने पर जमीन मालिक ने 2006 में हाईकोर्ट का रुख किया। सरकार ने 17 मई 2007 को लैंड एक्विजिशन एक्ट की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी की। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 2009 में जमीन की किस्मों के हिसाब से अलग-अलग मुआवजा तय किया। रेफरेंस कोर्ट/जिला जज शिमला ने 2017 में सभी श्रेणियों की जमीन का मुआवजा बढ़ाकर 15,000 प्रति बिस्वा कर दिया और उखाड़े गए पेड़ों के लिए 25,000 मुआवजा दिया। जमीन मालिक ने हाईकोर्ट में अपील की कि जब सरकार ने 1990 में ही उनकी ज़मीन छीन ली थी, तो 1990 से 2007 के बीच जमीन का इस्तेमाल न कर पाने का हर्जाना क्यों नहीं दिया गया।
1990 से ही जमीन मालिक अपनी भूमि के उपयोग से वंचित रहा
अदालत ने पाया कि सड़क निर्माण 1988-1990 में पूरा हो गया था और 1990 से ही जमीन मालिक अपनी भूमि के उपयोग से वंचित रहा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह वर्ष 1990 (कब्जा लेने की तिथि) से 17 मई 2007 (धारा 4 की अधिसूचना जारी होने की तिथि) की अवधि के लिए तयशुदा मुआवजे की राशि पर 15% प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त ब्याज हर्जाना प्रदान करे। 17 मई 2007 (धारा 4 की अधिसूचना) से 1 वर्ष की अवधि के लिए 9 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज, उसके बाद से लेकर न्यायालय में बढ़ी हुई राशि जमा कराने की तिथि तक 15 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज दिया जाए।
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