Himachal: शोघी में 45% उद्योग बंद, सब्सिडी हड़पकर कई उद्योगपतियों ने समेटा कारोबार

सूरतेहाल: शोघी में 45 फीसदी उद्योग बंद, लटके हैं ताले, सब्सिडी डकार कई उद्योगपति ने समेटा बोरिया-बिस्तर
हिंदी टीवी न्यूज, शोघी(शिमला)। Published by: Megha Jain Updated Sat, 31 Oct 2026
शिमला जिले के इकलौते औद्योगिक क्षेत्र शोघी में 45 फीसदी उद्यमियों ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया है। कुछ ने कारखानों को ताला जड़ दिया तो कुछ औद्योगिक इमारतें खंडहर बन गई हैं।
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के इकलौते औद्योगिक क्षेत्र शोघी में 45 फीसदी उद्यमियों ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया है। कुछ ने कारखानों को ताला जड़ दिया तो कुछ औद्योगिक इमारतें खंडहर बन गई हैं। यहां कई उद्योग ऐसे भी हैं जहां उत्पादन नहीं हो रहा, बल्कि होलसेल का कारोबार चल रहा है। कुछ में न मशीनरी, न उत्पादन, केवल चौकीदार निगरानी के लिए रखे हैं। सारा खेल हिमाचल प्रदेश सरकार से पूर्व में बनाई गई औद्योगिक नीति से सब्सिडी लेने का है। इसके तहत उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन खरीद से लेकर बिजली और कई अन्य तरह की सस्ती सुविधाएं मिलती हैं। शोघी औद्योगिक क्षेत्र में कुल 104 उद्योग हैं, लेकिन जमीन पर करीब 60 उद्योग ही संचालित हैं।
44 उद्योग पूरी तरह बंद हो चुके हैं या फिर इनकी इमारतें खाली
44 उद्योग पूरी तरह बंद हो चुके हैं या फिर सिर्फ इन उद्योगों की इमारतें खाली हैं। कुछ उद्योगपतियों ने 10-10 प्लाट खरीद लिए, जबकि उद्योग दो-तीन में चल रहे हैं। कुछ ने प्लॉट सबलेट कर रखे हैं। कुछ औद्योगिक भवनों के गेट पर घास-फूस उग आई, जिससे लगता है कि ये लंबे समय से बंद पड़े हैं। कई उद्योगपति कारखानों से मशीनें भी समेट कर ले गए हैं। बंद उद्योगों में प्रोसेस डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल, लिफाफे, गद्दे तैयार किए जाते थे। यहां गाड़ियों के पांच-छह शोरूम, रॉयल एनफील्ड का शोरूम, कॉस्मेटिक, बर्तन, कॉटन, प्रिंटिंग प्रेस, बीयर प्लांट और एक प्लास्टिक की पानी की टंकियां तैयार करने वाला उद्योग है। यहां चार आटा मिल हैं, जहां ज्यादातर आटे की पिसाई सरकार करवाती है और उसे सरकारी राशन डिपुओं में राशनकार्ड धारकों को उपलब्ध करवाया जाता है।
तैयार माल की खपत के लिए मार्केट का अभाव
इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईएडीए) के सदस्य शिवम ने बताया कि उद्योगपतियों को यहां निराशा इसलिए मिली, क्योंकि यहां आसपास इतनी बड़ी कोई मार्केट नहीं है, जहां उद्योगपति अपने तैयार माल की खपत कर सकें। कच्चा माल बाहरी राज्यों से लाया जाता है, जिसका खर्च अधिक पड़ता है। इसके बाद तैयार माल को भी हिमाचल प्रदेश से बाहर जाकर ही बेचना पड़े तो फिर यह उद्योगपतियों के लिए नफे का नहीं घाटे का सौदा होता है। ऐसे में उद्योगपतियों को नुकसान हो रहा है।














