हिमाचल: रेणुकाजी में 10 साल बाद टाइगर की दहाड़, 2 अक्टूबर से पर्यटकों को दीदार

हिमाचल: रेणुकाजी में 10 साल बाद फिर गूंजी टाइगर की दहाड़, दो अक्टूबर से होंगे पर्यटकों को दीदार; जानें सबकुछ
हिंदी टीवी, ददाहू (सिरमौर)। Published by: Megha Jain Updated Mon, 21 Sep 2026
सिरमौर के रेणुकाजी मिनी जू में लंबे इंतजार के बाद रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा पहुंच गया है। महाराष्ट्र के नागपुर से करीब 1800 से 1900 किलोमीटर का सफर तय कर दोनों बाघ रविवार को रेणुकाजी पहुंचे। फिलहाल उन्हें अंदरूनी वार्ड में रखा गया है, जहां करीब 10 दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में नए वातावरण के अनुकूलन पर नजर रखी जाएगी। विभाग के अनुसार 2 अक्टूबर से पर्यटकों को बाघों का दीदार कराने की तैयारी है।
रेणुकाजी मिनी जू में करीब एक दशक से चला आ रहा टाइगरों का इंतजार अब खत्म हो गया है। महाराष्ट्र के नागपुर से रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा करीब 1800 किलोमीटर का सफर तय कर रविवार दोपहर रेणुकाजी पहुंच गया। बाघों के पहुंचते ही वन्यजीव विभाग में उत्साह का माहौल है, लेकिन पर्यटकों को अभी इनके दीदार के लिए करीब 10 दिन और इंतजार करना होगा।
नागपुर से रेणुकाजी तक लंबा सफर
टाइगरों का जोड़ा महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा से विशेष वाहन के जरिए हिमाचल लाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में सफर की दूरी करीब 1800 से 1900 किलोमीटर बताई गई है। पूरे सफर के दौरान वन्य प्राणी विभाग की टीम बाघों के साथ रही और उनके भोजन, पानी, विश्राम तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखा गया। रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों बाघों को सुरक्षित तरीके से वाहन से उतारकर अंदरूनी वार्ड में पहुंचाया गया। नए वातावरण में उन्हें सहज बनाने के लिए अभी उन्हें सीधे पर्यटकों के सामने नहीं लाया जा रहा है।
टाइगरों का जोड़ा महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा से विशेष वाहन के जरिए हिमाचल लाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में सफर की दूरी करीब 1800 से 1900 किलोमीटर बताई गई है। पूरे सफर के दौरान वन्य प्राणी विभाग की टीम बाघों के साथ रही और उनके भोजन, पानी, विश्राम तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखा गया। रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों बाघों को सुरक्षित तरीके से वाहन से उतारकर अंदरूनी वार्ड में पहुंचाया गया। नए वातावरण में उन्हें सहज बनाने के लिए अभी उन्हें सीधे पर्यटकों के सामने नहीं लाया जा रहा है।















