हिमाचल: लाखों की आय में 13 करोड़ की जमीन खरीद, विजिलेंस रिकॉर्ड ED-आयकर को भेजेगी

हिमाचल: लाखों की आय, 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद; विजिलेंस रिकॉर्ड आयकर विभाग और ED को भेजने की तैयारी में
हिंदी टीवी न्यूज, धर्मशाला। Published by: Megha Jain Updated Wed, 23 Sep 2026
रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार के नाम करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंच सकता है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में वर्ष 2011 से 2025 के बीच धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड खंगाला गया है।
रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार के नाम करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचेगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में जमीन खरीद और परिवार की घोषित आय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जांच में बैंक खातों और आयकर रिटर्न की पड़ताल के बाद जमीन खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत पर सवाल उठाए गए हैं। विजिलेंस अब मामले से संबंधित रिकॉर्ड आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भेजने की तैयारी कर रहा है।
विजिलेंस की जांच में इस आशंका की भी पड़ताल की जा रही है कि जमीन खरीद के लिए किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों की ओर से धन उपलब्ध कराया गया हो। आगे की जांच में जमीन की खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत, बैंक लेनदेन, आयकर विवरणियों और परिवार के सदस्यों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन को खंगाला जाएगा। जांच से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर इसी वित्तीय पहलू को लेकर मामला आयकर विभाग और ईडी को भेजने की कार्रवाई प्रस्तावित है।
सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी का भी आरोप
मामले में केवल जमीन खरीद की वित्तीय जांच ही नहीं बल्कि सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का आरोप भी एफआईआर में दर्ज है। विजिलेंस की एफआईआर के अनुसार सरकारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में गलत म्यूटेशन दर्ज करने और सरकारी भूमि पर मंगला देवी का नाम ‘कबिजान गैर-मरूसी’ के रूप में दर्ज करने से राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। एफआईआर में इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार धर्मशाला अमर सिंह, तत्कालीन कानूनगो वीरेंद्र कुमार, तत्कालीन पटवारी मनीष कुमार, नेक राम, उनकी पत्नी किरण बाला, मंगला देवी समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसे भी आरोपी बनाया जा सकता है।















