हिमाचल: 414 एड्स कर्मी नियमित नहीं होंगे, आशा वर्करों की भी स्थायी नीति नहीं

हिमाचल विधानसभा: नियमित नहीं होंगे 414 एड्स नियंत्रण कर्मी, आशा वर्करों के लिए भी स्थायी नीति नहीं
हिंदी टीवी, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Tue, 01 Sep 2026
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में एड्स नियंत्रण के लिए 18 गैर सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं के तहत 414 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी संबंधित गैर सरकारी संस्थाओं के अधीन साल-दर-साल के अनुबंध समझौते के आधार पर काम कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में एड्स नियंत्रण संस्थाओं के तहत कार्यरत 414 कर्मचारियों को नियमित करने का सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री धनीराम शांडिल ने सोमवार को यह स्थिति स्पष्ट की। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में एड्स नियंत्रण के लिए 18 गैर सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं के तहत 414 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी संबंधित गैर सरकारी संस्थाओं के अधीन साल-दर-साल के अनुबंध समझौते के आधार पर काम कर रहे हैं। सरकार की ओर से इन कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने का न तो कोई प्रस्ताव है और न ही ऐसा कोई विचार किया जा रहा है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आशा वर्करों के नियमितीकरण के लिए भी सरकार भविष्य में कोई नीति नहीं बनाएगी। नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आशा वर्करों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के रिक्त पदों पर मर्ज या समायोजित करने का भी कोई विचार नहीं है। मंत्री ने बताया कि आशा वर्कर प्रोत्साहन राशि आधारित कार्यकर्ता हैं। वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत केंद्र सरकार के मानदंडों और एनएचएम के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करती हैं। उन्हें प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि के साथ राज्य सरकार की ओर से मानदेय दिया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में आशा वर्करों के लिए स्थायी नीति का कोई प्रावधान नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में उनकी योग्यता के अनुरूप ऐसा कोई अलग कैडर भी मौजूद नहीं है, जिसके तहत उन्हें विभाग के रिक्त पदों पर समायोजित या मर्ज किया जा सके।















