हिमाचल: साइबर ठगों पर शिकंजा, RBI और पुलिस की संयुक्त रणनीति

हिमाचल: साइबर ठगों की अब खैर नहीं, आरबीआई और पुलिस ने मिलाया हाथ, बनाई संयुक्त रणनीति
हिंदी टीवी न्यूज,शिमला। Published by: Megha Jain Updated Sat, 20 Jun 2026
आरबीआई ने बैंकिंग क्षेत्र और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की पहल की है। इसी क्रम में शुक्रवार को शिमला में एक कार्यशाला करवाई गई।
साइबर और केवाईसी धोखाधड़ी पर आरबीआई और हिमाचल पुलिस मिलकर शिकंजा कसेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने साइबर ठगी और फर्जी केवाईसी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। आरबीआई ने बैंकिंग क्षेत्र और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की पहल की है। इसी क्रम में शुक्रवार को शिमला में एक कार्यशाला करवाई गई। कार्यशाला का विषय साइबर-सक्षम एवं केवाईसी संबंधी धोखाधड़ी के विरुद्ध सुरक्षा सुदृढ़ीकरण रहा। इसमें आरबीआई, हिमाचल पुलिस और विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों से निपटने की संस्थागत तैयारियों को मजबूत करना रहा, साथ ही, बैंकिंग क्षेत्र और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना भी लक्ष्य था।
आरबीआई शिमला के क्षेत्रीय निदेशक अनुपम किशोर ने डिजिटल खतरों के बदलते स्वरूप पर बात की। उन्होंने बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग को आवश्यक बताया। आरबीआई केंद्रीय कार्यालय की मुख्य महाप्रबंधक पुष्पमित्रा साहू ने मनी म्यूल खातों के जोखिमों पर चर्चा की। उन्होंने ग्राहक सत्यापन प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह और पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम और त्वरित जांच में सहयोग का भरोसा दिलाया।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों में जानकारी दी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सामने आ रहे नए साइबर अपराध रुझानों पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने ऑनलाइन ठगी के तौर-तरीकों और वित्तीय धोखाधड़ी के विभिन्न स्वरूपों की जानकारी दी। कार्यशाला का समापन एक खुली परिचर्चा के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने जांच में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने सूचना साझाकरण और सहयोग को प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने तकनीकी क्षमता और सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। संस्थागत समन्वय को लगातार मजबूत करना समय की मांग है।















