हाईकोर्ट: तलाक के बाद भी बच्चे को मिलेगा पिता के सेवा लाभों में हिस्सा

Highcourt: तलाक के बाद भी बच्चे को पिता के सेवा लाभों में समान हिस्सा, पिता और संतान का संबंध नहीं होता खत्म
हिंदी टीवी न्यूज,चंडीगढ़ । Published by: Megha Jain Updated Wed, 15 Jul 2026
अदालत ने कहा कि पहली पत्नी से जन्मे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान इसलिए है क्योंकि वे पिता के साथ नहीं रह रहे हो सकते हैं। विधायी मंशा यह है कि माता-पिता के तलाक के कारण बच्चे को पिता की सरकारी सेवा के लाभों से वंचित न किया जाए।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि माता-पिता के तलाक के बावजूद बच्चा पिता के सरकारी सेवा लाभों से वंचित नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने दूसरी पत्नी की दलीलों को अस्वीकार कर दिया। दूसरी पत्नी ने कहा था कि पहली पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता दिया जा चुका था। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थायी गुजारा भत्ता या बच्चे के भरण-पोषण के लिए दी गई राशि वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। न्यायालय ने हरियाणा सिविल सेवा (अनुकंपा वित्तीय सहायता या नियुक्ति) नियम, 2019 के नियम 28 का हवाला दिया। इसमें आश्रित बच्चा के बजाय पात्र बच्चा शब्द का प्रयोग किया गया है।
नियमों का उद्देश्य
अदालत ने कहा कि पहली पत्नी से जन्मे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान इसलिए है क्योंकि वे पिता के साथ नहीं रह रहे हो सकते हैं। विधायी मंशा यह है कि माता-पिता के तलाक के कारण बच्चे को पिता की सरकारी सेवा के लाभों से वंचित न किया जाए। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि संपत्ति में हिस्सेदारी और अनुकंपा वित्तीय सहायता दो अलग-अलग कानूनी क्षेत्र हैं। संपत्ति में हिस्सा मिलने के आधार पर किसी पात्र बच्चे को अनुकंपा वित्तीय सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता।














