मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा, गवाहों ने बयां की सौरभ की हत्या की कहानी

मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा: मेडिकल स्टोर से मनाली तक, गवाहों के बयानों ने बयां की सौरभ की मौत की कहानी
हिंदी टीवी ,मेरठ। Published by: Megha Jain Updated Thu, 15 Oct 2026
मेरठ नीले ड्रम कांड में गवाहों ने कोर्ट में बताई सौरभ की हत्या की पूरी कहानी सुनाई। मेडिकल स्टोर से मनाली तक, ऐसे खुली खूनी इश्क की परतें। इन्हीं की वजहों से कातिलों को सजा-ए-मौत मिली। सौरभ हत्याकांड में पुलिस ने 54 दिन में आरोप-पत्र दाखिल किए। कोर्ट में 22 गवाहों ने बयान दिए। 590 दिन बाद कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।
मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने पति की हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला जज ने 30 सितंबर 2026 को 22 गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था।
सौरभ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के तीन श्लोकों का जिक्र किया है। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि 163 पेज के आदेश में एक का श्लोक जिक्र करते हुए जिला जज ने कहा कि बाघ है तो जंगल सुरक्षित हैं। इसी तरह कानून है तो मनुष्य सुरक्षित हैं। न्याय का धर्म है अपराधी को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार सजा मिले।















